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SundaRam Verma Sikar : 3 बार लगी सरकारी नौकरी ठुकराकर अपनाई खेती, मिलेगा पद्म श्री अवार्ड

सीकर। सुंडाराम वर्मा। यह नाम राजस्थान के किसानों में किसी परिचय का मोहताज नहीं। कहने को तो ये किसान हैं, मगर इनकी सोच, समझ और नवाचार किसी कृषि वैज्ञानिक से कम नहीं। इस बात का सबूत है पद्मश्री अवार्ड, जो 16 मार्च 2020 को राष्ट्रपति के हाथों किसान सुंडाराम को मिलेगा।

सीकर के गांव दांता के रहने वाले हैं सुंडाराम

सीकर के गांव दांता के रहने वाले हैं सुंडाराम

राजस्थान के सीकर जिले दांतारामगढ़ उपखंड के गांव दांता निवासी किसान सुंडाराम वर्मा को देश-विदेश में एक दर्जन से अधिक बड़े पुरस्कार मिल चुके हैं। 48 साल पहले कृषि विज्ञान में स्नातक करने वाले सुंडाराम वर्मा का छोटे से गांव दांता से पद्मश्री अवार्ड तक का सफर बेहद रोचक और प्रेरणादायी है। सुंडाराम वर्मा बताते हैं कि पद्मश्री अवार्ड दिए जाने की घोषणा उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी है। जैव विविधता, पर्यावरण और जल संरक्षण पर कार्य के उपलक्ष्य में पद्मश्री मिलने से मेरे इस कार्य को अधिक गति मिलेगी।

 48 साल पहले की बीएससी

48 साल पहले की बीएससी

सुंडाराम वर्मा की मानें तो कृषि की ओर उनका रुझान 48 साल पहले वर्ष 1972 में उस समय ही हो गया था। जब बीएएसी की और फिर तीन बार टीचर की सरकारी नौकरी लगी। तब सरकारी शिक्षक बनने की बजाय सुंडाराम ने खेती चुनी और शुष्क वानिकी विधि काम करने लगे। ऐसी तकनीकी वि​कसित करने में सफलता हासिल की, जिससे एक लीटर पानी में ही पौधे को पेड़ बनाया जा सकता है। सीकर के किसान सुंडाराम की एक लीटर पानी में एक पौधा तकनीक को राजस्थान सरकार के जल संरक्षण विभाग ने भी मान्यता प्रदान की। कृषि वैज्ञानिक और हरित क्रांति के जनक डॉ. स्वामीनाथन ने भी प्रशंसा की। एक लीटर पानी पौधा तैयार करने की तकनीक में सुंडाराम को दस साल लगे थे।

 15 फसलों की 700 प्रजातियां

15 फसलों की 700 प्रजातियां

सुंडाराम ने राजस्थान की फसल मिर्च, चौळा, ग्वार, धनिया, काबुली चना और मैथी समेत 15 फसलों की करीब 700 प्रजातियों का संकलन कर गहन अध्ययन भी किया और फिर कम पानी, कम लागत में अच्छी पैदावार के गुर किसानों को सिखाए। सुंडाराम के इस कार्य को दिल्ली के पूसा संस्थान ने भी मान्यता दी है।

 तीन साल में सात फसलें

तीन साल में सात फसलें

सुंडाराम को राजस्थान का देसी कृषि वैज्ञानिक भी कहा जाता है। ये बीते 25 साल कृषि कार्य को सरल बनाने और खेती नवाचार करने में जुटे हैं। इन्होंने आदर्श फसल चक्र का भी निर्माण किया,​ जिसमें तीन साल में सात फसलें प्राप्त की जा सकती हैं। किसान को एक हैक्टेयर में एक लाख रुपए का लाभ प्राप्त हो सकता है।

 ​कनाड़ा सरकार ने भी दिया पुरस्कार

​कनाड़ा सरकार ने भी दिया पुरस्कार

सुंडाराम को यूं तो अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं, मगर कृषि विधि में सबसे पहला पुरस्कार कनाडा में वर्ष 1997 में एग्रो बायो डायवर्सिटी बायो अवार्ड मिला। दूसरी बार वर्ष 1998 में राष्ट्रीय स्तर का जगजीवन राम किसान पुरस्कार प्राप्त हुआ। तीसरा पुरस्कार राज्य सरकार द्वारा वन पंडित पुरस्कार दिया गया।

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