Ground Report ISHARDA DEM: ईआरसीपी पर सियासत अब ईसरदा बांध की भूमि अवाप्ति, अवार्ड सवालों के घेरे में ?
Ground Report ISHARDA DEM: एक ऐसा प्रदेश जिसे सियासत ने बांट दिया दो नामों से एक का नाम पूर्वी राजस्थान और दूसरे का नाम पश्चिमी राजस्थान, जी हां कहीं भी चले जाइए इन्ही नामों से जाना और पिछले कई सालों से पुकारा जा रहा है।
पूर्ववर्ती गहलोत सरकार में ईआरसीपी(Eastern Rajasthan Canal Project) यानी पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को लेकर पूरे पांच साल तक जमकर सिसायी बवाल देखने और सुनने को मिला।
कभी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ईआरसीपी को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर तो कभी पूर्व केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पलटवार करते । देखते ही देखते ही ईआरसीपी राष्ट्रीय सियासी मुद्दा बन गई।

लेकिन ना तो दौसा को पानी मिला,ना सवाईमाधोपुर को ना ही गंगापुरसिटी, लालसोट करौली को हालांकि इस पूरी योजना में झालावाड़, बारां, कोटा बूंदी, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर, दौसा, करौली, अलवर, भरतपुर और धौलपुर को शामिल किया गया था।
ERCP का उद्देश्य दक्षिणी राजस्थान में चंबल, कुन्नू, पार्वती, कालीसिंध सहित इसकी सहायक नदियों में बरसात के मौसम में उपलब्ध अतिरिक्त जल का संचयन करना और इस जल का उपयोग राज्य के दक्षिण-पूर्वी ज़िलों में करना है, जहाँ पीने तथा सिंचाई के लिये जल की कमी है।
पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का उद्देश्य वर्ष 2051 तक दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में मानव तथा पशुधन हेतु पीने के जल तथा औद्योगिक गतिविधियों हेतु जल की आवश्यकताओं को पूरा किया जाना है।
वन इंडिया हिंदी की टीम ने ईसरदा बांध पर पहुंची तो वहां राष्ट्रीय किसान महापंचायत युवा प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर चौधरी सहित कई किसानों और स्थानीय लोगों से बातचीत की।
किसान नेता रामेश्वर चौधरी ने बांध के निर्माण और इसके डूब क्षेत्र के किसान परिवारों को मुआवजा निर्धारण से लेकर विस्थापन की प्रक्रिया पर कई सवाल उठाएं है।
रामेश्वर चौधरी ने बताया कि सरकार की ओर से बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले कई किसान परिवारों को उनकी जमीन का सही मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। सिंचित जमीनों को भी असिंचित मानकर मुआवजा राशि तय की गई है।
चौधरी ने बांध के निर्माण में किसानों की भूमि की अवाप्ति को भी नियम विरूद्ध बताया है। उन्होने वन इंडिया से खास बातचीत करते हुए कहा कि बांध के निर्माण की अधिसूचना जारी होने के एक साल बाद भी भूमि अवाप्ति नहीं की गई। इसके बाद भी निर्धारित तारीख और अतिरिक्त समय के निकलने के बाद भी अधिकारियों ने अवार्ड्स जारी नहीं किए गए।
इस बांध के निर्माण में पूरी प्रक्रिया ही नियम विरूद्ध है इसमें पुर्नवास विभाग से लेकर राजस्व और परियोजना से जुड़े अधिकारियों की बड़ी लापरवाही है। कई विरोध,प्रदर्शन किए लेकिन सरकार और अधिकारियों ने कोई सुध नहीं ली है।
किसान नेता रामेश्वर चौधरी ने अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों के साथ समझौता तो यह हुआ था कि जहां लोग चाहेंगे वहां उन्हे विस्थापित किया जाएगा। लेकिन हाल ही में एक आदेश जारी कर यह कह दिया गया कि प्रभावित लोगों को विस्थापित करने के लिए लॉटरी जारी की जाएगी। जो किसानों के जले पर नमक छिड़कने जैसा है।
चौधरी ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि ईसरदा बांध के निर्माण को ईआरसीपी योजना से जोड़कर पहले कांग्रेस और अब भाजपा सियासी प्रचार प्रचार कर रही है। लेकिन हैरत की बात तो यह है कि इस बांध को अब तक ईआरसीपी योजना से ना तो जोड़ा गया है ना ही इस योजना से इस बांध का कोई लेना देना है।
जबकि ईआरसीपी योजना और ईसरदा बांध से पानी की मांग को लेकर टोंक जिले में निवाई उपखंड इलाके के किसान लगातार आंदोलन,प्रदर्शन और ट्रैक्टर रैली भी कर चुके है लेकिन राज्य और केंद्र सरकार ने अब तक कोई समाधान नहीं किया। हालांकि ईआरसीपी योजना में 2 लाख 81 हजार हैक्टेयर जमीन सिंचित करने के दावे कर रहे है।
किसान नेता रामेश्वर चौधरी ने किरोड़ी लाल मीना के इस्तीफे को लेकर भी पलटवार करते हुए कहा कि उन्होने समय रहते इस परियोजना को लेकर कोई काम किया ही नहीं। केंद्र सरकार ना तो किसानों की पीड़ा समझती है ना ही उनका समधान करती है। आप तो सिर्फ किसानों के साथ कुठाराघात किया है।
चौधरी ने किरोड़ी लाल मीना से मांग करते हुए कहा कि इस बांध के निर्माण और इसके किसानों को मिलने वाले लाभ को लेकर आपको भी आंदोलन करना चाहिए। किसानों की पीड़ा को उठाना चाहिए।
स्थानीय लोगों ने भी सरकार से जमीनों का मुआवजा देना चाहिए। सिंचित जमीनों का भी उसी अनुसार मुआवजा देना चाहिए।
आपकों बता दें कि फिलहाल ईसरदा बांध का निर्माण जलदाय विभाग की ओर करवाया जा रहा है। वाटर रिसोर्स डवलम्पमेंट विभाग इसकी मॉनिटरिंग एजेंसी है और इस बांध का निर्माण ओम इंफ्रा लिमिटेड की ओर से करवाया जा रहा है।
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