Jalor Lok Sabha Seat: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत की राह में कौन बन रहा रोड़ा...?
Rajasthan Lok Sabha Election: राजस्थान में लोकसभा चुनाव का रण अब रौचक होता जा रहा है। भाजपा-कांग्रेस के आमने-सामने की जंग में अब बसपा भी मैदान में उतर गई है।
आज फिर बसपा ने राजस्थान की तीन सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान कर भाजपा के साथ कांग्रेस के प्रत्याशियों ने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

बहुजन समाज पार्टी ने जालौर-सिरोही से लालसिंह राठौड़, भरतपुर से इंजियर अंजला और कोटा लोकसभी सीट से भीम सिंह कुंतल को लोकसभा के रण उतार दिया है।
अब अगर बात करे राजस्थान में कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे और आरसीए के पूर्व अध्यक्ष वैभव गहलोत की तो जालौर से लालसिंह राठौड़ के नाम का ऐलान होने के बाद मुश्किले और बढ़़ने वाली है।
आपकों बता दे कि पिछली बार लोकसभा चुनाव 2019 में वैभव गहलोत को जोधपुर सीट से मैदान में उतारा गया था। लेकिन इस बाद जालोर-सिरोही लोकसभा सीट के लिए वैभव गहलोत पर दांव लगाया गया है।
जालोर-सिरोही सीट वैसे तो कांग्रेस का गढ़ रही है। लेकिन साल 1999 के बाद इस सीट पर कांग्रेस को लगातार चार बार हार का सामना करना पड़ा है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वैभव गहलोत पर कांग्रेस का दांव सटीक होगा या नहीं ? क्योंकि पिछली बार जोधपुर सीट पर वैभव गहलोत को हार का सामना करना पड़ा था।
उधर जालोर-सिरोही लोकसभा सीट पर बीजेपी ने लुंबाराम चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया है। लुंबाराम चौधरी सिरोही के मूल निवासी है। ऐसे में वह इस सीट पर स्थानीय निवासी है।
वैभव गहलोत के लिए इस सीट पर चुनौती कम नहीं है। वहीं बीजेपी पिछले चार चुनाव से लगातार जीत दर्ज करते आ रही है।
इसके साथ ही जालोर में बाहरी का विरोध करने वाले लालसिंह राठौड़ ने बसपा का दामन थाम लिया है और बसपा ने राठौड़ को उम्मीदवार के नाम का ऐलान भी कर दिया। लालसिंह कांग्रेस के पूर्व जिला उपाध्यक्ष रह चुके हैं, अब बसपा का दामन थाम कर सियासी रण में उतरने के बाद कांग्रेस के वैभव गहलोत के लिए जीत की राह ज्यादा मुश्किल होती नजर आ रही है।












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