8 साल में बनी थी 'बालिका वधू', नीट का एक्जाम क्लियर कर अब बनेंगी डॉक्टर
राजस्थान, कोटा। जब आपके हौसलो के पर लग जाए तो उस उड़ान को कोई रोक नहीं सकता। सिर्फ 8 साल की उम्र में बालविवाह का शिकार होने के बाद और कई परेशानियों का सामना करने के बाद राजस्थान की रुपा अब डॉक्टर बनने जा रही है। इस साल के नीट (NEET) एक्जाम में शानदार अंक हासिल कर रुपा ने सपनों की उड़ान भर दी हैं।

अपने पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी राजस्थान के करेरी गांव की रहने वाली रुपा जब तीसरी कक्षा में थी तब उसका विवाह शंकर लाल से हो गया था जिसकी उम्र भी मात्र 12 साल थी। रुपा के ससुराल वालों ने उसके सपनों को साकार करने में बहुत मदद की।
इस साल नीट परीक्षा में 603 अंक हासिल करने वाली रुपा को भरोसा है कि उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल जाएगा।
रुपा के संघर्ष की कहानी कोई आम नहीं है वो उस सोशल बैकग्राउंड से आती है जहां समाज में आज भी महिलाओं पर कई पाबंदिया है। ऐसे में छोटी सी उम्र में शादी के बाद भी रुपा ने अपनी पढ़ाई को जारी रखते हुए 10वीं और 12वीं में 84 प्रतिशत अंक हासिल किए। रुपा के लगन को देखकर उनके ससुराल वालों ने रूपा को आगे की पढाई जारी रखने को कहा और मेडिकल एक्जाम की तैयारी के लिए कोटा भेज दिया। इस बार मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने के लिए रुपा का यह तीसरा प्रयास था।
रुपा के अनुसार मेडिकल सहायता की कमी के कारण उनके अंकल को दिल का दौरे पड़ने से नहीं बचाया जा सका। उसके बाद ही उसने डॉक्टर बनने का ठान लिया था। जब रुपा मेडिकल की तैयारी करने के लिए कोटा गयी तब एल्लन कोचिंग इंस्टीट्यूट (Allen coaching institute) ने 75 प्रतिशत तक उसकी कोचिंग फीस माफ कर दी और अब आगे कॉलेज के चार साल तक भी एल्लन कोचिंग इंस्टीट्यूट ही रुपा की मदद करेगा।












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