जोधपुर में ब्लाइंड मर्डर का 12 साल बाद फिल्मी स्टाइल में खुलासा, पुलिस के हत्थे चढ़े तीन नामजद आरोपी

Rajasthan News: जोधपुर के फलोदी में 12 साल बाद पुलिस ने खोला मुनीम की हत्या का राज, तीन ईनामी बदमाशों की गिरफ्तारी के बाद निकले नक्सलियों से संबंध।

पुलिस टीम में शामिल अधिकारियों और जवानों ने फिल्मी स्टाइल में कहीं श्रमिक का रूप धरा, कहीं गायें चराई, तो कहीं खेतों में फसल काट तीनों नामजद आरोपियों को कड़ी मशक्कत के बाद गिरफ्तार किया है।

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फलोदी थाना क्षेत्र में करीब 12 साल पहले सोनामुखी की फैक्ट्री के मुनीम की हत्या कर डेढ़ लाख की नकदी लूट कर भागे तीन आरोपियों को जोधपुर रेंज पुलिस की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद गिरफ्तार कर सफलता हासिल की है।

पुलिस ने इस मिशन को ऑपरेशन ललनटॉप का नाम दिया। आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस के अपराधियो तक पहुंचने पर उनके साथ चुनाव चर्चा में फलोदी के सट्टा बाज़ार और बालों में लगाने के लिए सोजत की मेहन्दी पर विशेष जानकारी आरोपियों को होने पर हत्याकांड का खुलासा हुआ।

जोधपुर रेंज के आईजी विकास कुमार ने बताया कि फलोदी थाने के खींचन कस्बे में स्थित सोनामुखी फैक्ट्री में बतौर श्रमिक लगे तीन श्रमिक लालदेव, उदय और नरेश ने फैक्ट्री के ही मुनीम कोजाराम को शराब के नशे में गला घोंटकर हत्या कर दी थी और उसके पास रखी डेढ लाख की तकनीक थी और ना ही सीसीटीवी कैमरे थे।

जिसके चलते वारदात को अंजाम देकर फरार हुए मुल्जिमों के नाम पते और फोटो भी उपलब्ध नहीं थे। पुलिस ने करीब बारह साल पूर्व घटित इस हत्या और लूट की वारदात को खोलने के लिए तीनों अज्ञात आरोपियों के खिलाफ 40-40 हजार के इनाम भी रखे थे। काफी समय तक पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए बिहार, आंध्रप्रदेश और पंजाब तक तलाश की।

इस दौरान पुलिस टीम में शामिल लोगों ने कहीं श्रमिक का रूप धरा, कहीं गायें चराई, तो कहीं खेतों में फसल काटी। आखिर तीनों नामजद आरोपियों लालदेव, उदय और नरेश को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।

प्रारंभिक जांच पडताल में आरोपियों के नक्सलियों से संबंध भी उजागर हुए और नक्सलियों के लिए वसूली, हत्या, हत्या प्रयास, डरा धमकाकर वसूली करने के भी मुकदमे हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए वर्तमान समय में सोशल नेटवर्किंग, आरोपियों के परिवार तक पहुंचने के लिए पुलिसकर्मियों को अपनी वेषभूषा व कार्यप्रणाली भी बदली पड़ी।

आईजी विकास कुमार ने पकड़े गए आरोपियों के बारे में बताया कि तीनों लोग घर परिवार की विपरीत परिस्थितियों के चलते अपना स्तर सुधारने के लिए बड़ा व्यापार करना चाहते थे लेकिन उनको इसके लिए धन की जरूरत थी और इसी लिए वो फलोदी के खींचन गांव में आए। यहां सोनामुखी फैक्ट्री में बतौर श्रमिक लगे।

लाखों के लेनदेन देखकर वारदात को अंजाम देने के लिए टिके रहे। फैक्ट्री का अधिकांश लेनदेन मुनीम कोजाराम करता था जिसको विश्वास में लेकर साथ खाना पीना शुरु कर दिया।

12 दिसंबर 2012 को शराब पार्टी के बाद नशे में धुत कोजाराम की लूट की नीयत से गला घोंटकर हत्या कर दी और फैक्ट्री में ही पड़ी सोनामुखी से भरी बोरियों के नीचे शव दबाकर मुनीम के पास रखी डेढ़ लाख की नकदी लेकर फरार हो गए।

इस वारदात को खोलने में जोधपुर रेंज के करीब 12 अधिकारी व जवानों ने भूमिका निभाई। इसके साथ ही बियर, यूपी, रहा। प्रारंभिक पूछताछ में तीनों आरोपियों ने करीब एक दर्जन वारदातें विभिन्न प्रदेशों व थाना क्षेत्रों में करना काबूल किया हैं।

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