स्कूल बंद हुआ तो रिटायर्ड अफसर ने शुरू किया गांव के बच्चों को पढ़ाना, भरतपुर मेयर भी हैं अभिजीत
भरतपुर। पहले भारतीय राजस्व सेवा के असफर। फिर राजस्थान के भरतपुर नगर निगम के मेयर और अब गांव नगला हीरापुर के स्कूल में शिक्षक। ये तीन भूमिकाएं निभाने वाले शख्स का नाम है अभिजीत। इन दिनों सुर्खियों में हैं। वजह है वर्तमान में देश के 'भविष्य' की चिंता करना। यही कारण है कि अभिजीत भरतपुर जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित अपने गांव नगला हीरापुर में चले जाते हैं और उन होनहार बच्चों को पढ़ाते हैं जिनकी पढ़ाई कोरोना महामारी की वजह से छूट गई।
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मुम्बई इनकम टैक्स कमिश्नर पद से हुए रिटायर
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में भरतपुर के मेयर व मुम्बई में इनकम टैक्स कमिश्नर पद से रिटायर हुए अभिजीत ने बताया कि उनके पैतृक गांव नगला हीरापुर में मीडिल स्कूल है, जो कोरोना महामारी के चलते बंद हो गया। ऐसे में कई स्कूली बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है। ऐसे में उन्होंने बच्चों को पढ़ाने का फैसला लिया।

अंग्रेजी और गणित पढ़ाते हैं
मीडिल स्कूल के पांचवीं के चुनिंदा विद्यार्थियों के साथ नगला हीरापुर में अस्थायी स्कूल शुरू किया, जिसमें पांचवीं कक्षा के बच्चों को सिर्फ अंग्रेजी व गणित विषय पढ़ाया जा रहा है ताकि आगे ये नवोदय विद्यालय में प्रवेश प्राप्त कर सके। स्कूल में पढ़ाई के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की सख्ती से पालना की जाती है।

इंजीनियरिंग ग्रेजुएट भी जुटा बच्चों को पढ़ाने में
भरतपुर मेयर अभिजीत ने बताया कि गांव नगला हीरापुर के इस अस्थायी स्कूल में तीन कक्षाएं चलती हैं, जिनमें इंजीनियरिंग ग्रेजुएट मोहित, बीएसटीसी डिग्री प्राप्त भानुप्रताप और खुद मेयर अभिजीत एक-एक कक्षा लेते हैं। अभिजीत की अनुपस्थिति में कप्तान सिंह कक्षा लेते हैं, क्योंकि अभिजीत के पास भरतपुर मेयर पद की जिम्मेदारी भी है। कई बार नगला हीरापुर में जाने के लिए समय नहीं मिल पाता है।

मिल रहा है सुकुन
भरतपुर मेयर अभिजीत कहते हैं मैं खुब पढ़ा। फिर आईआरएस में चयन तक हुआ। पूरी नौकरी कर ली। रिटायर भी हो गया, लेकिन स्कूल-कॉलेज और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान जो कुछ पढ़ा वो सब असल मायने में अब काम आ रहा है। इन होनहार बच्चों को पढ़ाकर सुकून मिलता है।












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