Rajasthan News: पाली में बोले मंत्री झाबर सिंह खर्रा, कहा-'3 से ज्यादा बच्चे तो नहीं मिलेगी सरकारी सुविधाएं'
Rajasthan News: राजस्थान के यूडीएच मिनिस्टर झाबर सिंह खर्रा का बड़ा बयान सामने आया है। मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि जनसंख्या पर नियंत्रण के प्रयास करते हुए केंद्र सरकार जल्द ही एक कानून लाने वाली है। इस कानून के तहत जिन दंपतियों को दो या तीन से ज्यादा बच्चे होंगे। उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रखा जाएगा।
मंत्री झाबर सिंह खर्रा रविवार को पाली के दौरे पर थे। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए खर्रा ने कहा की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है और संसाधन घट रहे हैं। ऐसे में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सरकार को सख्त कदम उठाने पड़ेंगे। भारत सरकार अपने स्तर पर एक कानून लाने का प्रयास कर रही है। जल्द ही वह कानून सबके सामने आ जाएगा। मंत्री झाबर सिंह खर्रा पाली दौरे के दौरान जिला परिषद की बैठक में भी शामिल हुए।

राजस्थान बजट 2024 के बारे में बात करते हुए मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि प्रदेश के चहुमुंखी विकास को ध्यान में रखते हुए यह बजट बनाया गया है। बजट में जो भी घोषणाएं की गई है। वह सभी पूरी होगी। मंत्री खर्रा कहा कि भाजपा केवल घोषणाएं नहीं करती। बल्कि संकल्प लेती है और उस संकल्प को हर हाल में पूरा करती है। सत्ता में आने से पहले पार्टी की ओर से जो संकल्प पत्र जारी किया गया था। उसी के अनुसार सभी विभागों को निर्देश दे दिए गए हैं। डबल इंजन की सरकार बनने के बाद प्रदेश की जनता को सरकार पर भरोसा कायम रखना चाहिए। उनसे किए गए हर वादे को पूरा किया जाएगा।
बजट घोषणाओं को लेकर मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि बजट की घोषणाओं पर समयबद्ध तरीके से काम करना शुरू किया जाएगा। सभी विभागों को बजट घोषणाओं को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाने की निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त से बजट घोषणाओं के कार्य धरातल पर नजर आना शुरू हो जाएंगे। हर कार्य समय पर पूरे किए जाएंगे। यह सरकार की गारंटी है।
आपको बता दें कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विश्व जनसंख्या दिवस पर राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह के दौरान जनसंख्या नियंत्रण को लेकर समुदाय विशेष पर तंज कसा था। उन्होंने कहा कि जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए अभियान तो चल रहे हैं। लेकिन एक खास समूह इससे अछूता है। सीएम शर्मा ने बढ़ती जनसंख्या को पर्यावरण असंतुलन से जोड़ा और उन लोगों में जागरूकता की जरूरत पर जोर दिया। जो अभी भी नहीं सुधरे हैं।












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