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Rajasthan: अजमेर दरगाह विवाद पर बोले सांसद असदुद्दीन ओवैसी, कहा-'BJP और RSS मस्जिदों पर नफरत क्यों फैला रहे'

Rajasthan News: राजस्थान की ऐतिहासिक अजमेर शरीफ दरगाह को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यह विवाद तब उभरा जब एक अदालत ने हिंदू सेना के इस दावे को स्वीकार कर लिया कि दरगाह मूल रूप से भगवान शिव का मंदिर था। इस घटनाक्रम के बाद देश भर में सियासी माहौल गरमा गया है।

ओवैसी का भाजपा और आरएसएस पर हमला

एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस विवाद को लेकर भाजपा और आरएसएस पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने दरगाह के 800 साल पुराने ऐतिहासिक महत्व और इसे पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक की सरकारों द्वारा मान्यता दिए जाने की बात को उजागर किया।

Asaduddin Owaisi

ओवैसी ने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम (1991) की निचली अदालतों द्वारा लगातार अनदेखी भारत के कानून और लोकतंत्र के लिए खतरा है। भाजपा और आरएसएस इस तरह के मुद्दों के जरिए देश की एकता और कानून के शासन को कमजोर कर रहे हैं।

सांसद इमरान मसूद ने की दखल की मांग

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुप्रीम कोर्ट से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। मसूद ने कहा कि यह विवाद राष्ट्रीय सद्भाव को नुकसान पहुंचा सकता है और यदि इसे रोका नहीं गया तो यह विस्तृत अशांति में बदल सकता है।

उन्होंने पूजा स्थल अधिनियम की अनदेखी के लिए सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा अपने राजनीतिक लाभ के लिए देश की धार्मिक विविधता और शांति को खतरे में डाल रही है।

सूफी काउंसिल ने जताई चिंता

ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के अध्यक्ष सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने भी विवाद पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस तरह के दावे देश के सामाजिक सद्भाव और अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

चिश्ती ने सरकार से आग्रह किया कि वह इस तरह के विवादों को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करे। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का भी हवाला दिया। जिसमें उन्होंने कहा था कि मस्जिदों के भीतर मंदिर खोजने की आवश्यकता पर सवाल उठाया जाना चाहिए।

संभल में मस्जिद सर्वेक्षण पर उपजा विवाद

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में हाल ही में हुई एक घटना ने धार्मिक स्थलों को लेकर बढ़ते तनाव को और गहरा कर दिया। मस्जिद का सर्वेक्षण कर रही एक कानूनी टीम को स्थानीय हिंसा का सामना करना पड़ा। जिससे धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों की संवेदनशीलता और इनका समाधान खोजने की तत्काल आवश्यकता स्पष्ट हो गई।

धार्मिक स्थलों और उनकी पहचान पर उठते सवाल

अजमेर शरीफ दरगाह विवाद ने एक बार फिर भारत में धार्मिक स्थलों और उनकी पहचान के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। विपक्षी दलों और धार्मिक संगठनों का कहना है कि इस तरह के विवाद देश की धार्मिक विविधता और विरासत के लिए खतरनाक हैं।

इस मुद्दे पर सरकार से मांग की जा रही है कि वह पूजा स्थल अधिनियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित करे और सामाजिक सद्भाव को खतरे में डालने वाले विवादों को रोकने के लिए त्वरित कदम उठाए।

राष्ट्रीय एकता के लिए गंभीर चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के विवाद राष्ट्रीय एकता के लिए गंभीर चुनौती पेश करते हैं। संवेदनशील धार्मिक स्थलों पर दावों की बढ़ती संख्या को रोकने के लिए कानूनी और प्रशासनिक उपायों की आवश्यकता है।

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