RSU के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए CM भूपेश और राज्यपाल हरिचंदन, 127 विद्यार्थियों को दी गई डिग्री

RSU Convocation: दीक्षांत समारोह में 127 विद्यार्थियों को 272 स्वर्ण पदक, 294 विद्यार्थियों को पीएच.डी., 1 लाख 17 हजार 31 विद्यार्थियों को स्नातक एवं 44 हजार 704 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर की डिग्री प्रदान की गयी।

bhupesh chandan

RSU Convocation: पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के 26वें दीक्षांत समारोह का आयोजन पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राज्यपाल तथा कुलाधिपति विश्वभूषण हरिचंदन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। उन्होेंने सभी पदक एवं उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी और कहा कि विद्यार्थी हमारे राष्ट्र की प्रमुख तकनीकी, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियों पर कार्य करने के विकल्प पर विचार करें, साथ ही सभी विद्यार्थी, राष्ट्र की सेवा में तत्पर रहें।

इस अवसर पर राज्यपाल हरिचंदन ने कहा कि देश को आज इस मुकाम तक पहंुचाने में हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने असंख्य कुर्बानियां दी हैं। महात्मा गांधी, सुभाष चन्द्र बोस और अनेक सेनानियों ने अपने-अपने तरीकों से भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्ति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गांधी जी के अहिंसात्मक तरीके से देश को आजाद कराने की कोशिश ने पूरे विश्व को आश्चर्य चकित कर दिया था। गांधी जी ने समाज के सभी वर्गाे, विशेष कर विद्यार्थियों को भी आजादी के आंदोलन में शामिल होने का आव्हान किया था।

नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने दिल्ली चलो का नारा देकर सभी लोगों से सशस्त्र संग्राम में शामिल होने की अपील की थी। हमें उन असंख्य सेनानियों के बलिदान को नहीं भूलना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि देश को आगे ले जाने में विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। स्वतंत्रता सेनानियों ने खुद को जिस तरह बलिदान कर देश को स्वतंत्र किया उसी तरह विद्यार्थियों को देश भक्ति की सोच लेकर देश की उन्नति एवं प्रगति में भागीदारी करने का आव्हान किया।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज दीक्षांत समारोह में 76 प्रतिशत बेटियां उपस्थित हैं। यह नारी सशक्तिकरण का प्रतीक है। महिलाएं अब अबला नहीं सबला बन रही हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही एकमात्र माध्यम है, जिसके जरिये हम विकास कर सकते हैं और अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। देश और प्रदेश के विकास में प्रदेश के युवाओं की अधिक से अधिक भूमिका हो, इसी उद्देश्य से प्रदेश के आदिवासी बहुल सुदूर बस्तर और सरगुजा सहित ग्रामीण अंचलों में, जहां भी आवश्यकता हुई वहां नए महाविद्यालय प्रारंभ किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए। मध्यप्रदेश के समय में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ का एक मात्र विश्वविद्यालय था। यह राज्य का सबसे पुराना तथा सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है। इस विश्वविद्यालय ने अनेक गौरवपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। छत्तीसगढ़ बनने के बाद अनेक विश्वविद्यालय खुले। बस्तर, सरगुजा, बिलासपुर में विश्वविद्यालय प्रारंभ हुए, केंद्रीय विद्यालय भी खुला।

पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय के 26 वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल श्री विश्वभूषण हरिचंदन ने राज्य गौसेवा आयोग के अध्यक्ष महंत श्री रामसुंदर दास को संस्कृत विषय में डी. लिट की उपाधि प्रदान की। दीक्षांत समारोह में 127 विद्यार्थियों को 272 स्वर्ण पदक, 294 विद्यार्थियों को पीएच.डी., 1 लाख 17 हजार 31 विद्यार्थियों को स्नातक एवं 44 हजार 704 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर की डिग्री प्रदान की गयी।

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