राजस्व रिकॉर्ड में गांव का नाम ही नहीं, पंचायत को जारी होता रहा फ़ंड, हाईकोर्ट पहुंचा मामला
नवनियुक्त मुख्यमंत्री की मुश्किलें दिव्य ग्राम गांव के नाम पर जारी किए गए फंड ने बढ़ा दी है। नूरमहल निवासी पूरन सिंह और गुरनाम सिंह ने इस बाबत सीनियर एडवोकेट बलतेज सिद्धू के ज़रिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
चंडीगढ़, अक्टूबर 13, 2021। विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच में पंजाब कांग्रेस अंदरूनी कलह से तो जूझ ही रही थी वहीं अब नवनियुक्त मुख्यमंत्री की मुश्किलें दिव्य ग्राम गांव के नाम पर जारी किए गए फंड ने बढ़ा दी है। नूरमहल निवासी पूरन सिंह और गुरनाम सिंह ने इस बाबत सीनियर एडवोकेट बलतेज सिद्धू के ज़रिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने हाईकोर्ट को कहा है कि दिव्य ग्राम गांव का नाम सरकार के राजस्व दस्तावेज में भी मौजूद ही नहीं है। बावजूद इसके पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के 13वें और 14वें वित्त आयोग, एमपी लैड, मनरेगा आदि के फंड दिव्य ग्राम गांव की पंचायत के नाम पर जारी किए जा रहे हैं।

बिना रिकॉर्ड पंचायत को फ़ंड जारी
याचिकाकर्ता का कहना है कि पंजाब सरकार अपनी तरफ से अलग-अलग मामले में गांव की पंचायत को विभिन्न योजनाओं का फंड जारी करती रही है। ग़ौरतलब है कि जिस गांव के पंचायत को फंड जारी किया गया है वह सरकारी रिकॉर्ड में नहीं है। इस मामले में जालंधर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अपनी रिपोर्ट पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सौंप दी है। हाईकोर्ट ने इस रिपोर्ट को याचिकाकर्ता को दिखाने का आदेश दिया है। याचिका देखने के बाद अगली सुनवाई में इस मामले में बहस की जाएगी। याचिकाकर्ता ने बताया कि पीएसपीसीएल से इस बारे में तथ्य जुटाने के लिए उन्होंने आरटीआई में जानकारी मांगी और पूछा कि इस गांव में बिजली के कितने कनेक्शन दिए गए हैं। पीएसपीसीएल ने बताया कि उनकी तरफ़ इस गांव में बीजली का कनेक्शन नहीं दिया गया है और ट्रासफर्मर भी नहीं लगाया गया है।
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राजस्व दस्तावेज में गांव का नाम नहीं
याचिकाकर्ता इस गांव के बारे में तहसीलदार से जानकारी मांगी तो उन्होंने में बताया कि ऐसा कोई गांव सरकार के राजस्व दस्तावेज में ही नहीं है। वहीं याचिका कर्ता का कहना है कि बीडीपीओ से जानकारी मिली कि इस गांव को 2015-16 से 2019-20 के बीच पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के 13वें और 14वें वित्त आयोग, एमपी लैड, मनरेगा आदि की ग्रांट जारी हुई है। इस जानकारी के बाद पिछले साल पांच मार्च को याचिकाकर्ताओं ने लीगल नोटिस भेजकर कार्रवाई की मांग की थी। इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं अब याचिकाकर्ताओं ने इस मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है।
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