चुनाव से पहले नाराज किसानों को मनाने में जुटे 'कैप्टन',लेकिन कर्मचारियों ने की सरकार के खिलाफ आंदोलन की तैयारी
पंजाब मंडी बोर्ड ने किसानों को स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए आवेदन देने की प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से इस साल पहली बार एक खास पोर्टल शुरू किया है। अब किसानों को आवेदन में होगी आसानी।
चंडीगढ़, अगस्त 9, 2021। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं इस बाबत पंजाब सरकार किसानों को सौगात दे कर लुभाने की कोशिश में लगी हुई है, ताकि चुनाव में इसका फ़ायदा मिल सके। वहीं कैबिनेट उपसमिति के साथ वार्ता विफल होने के बाद पंजाब के कर्मचारी अब बड़े आंदोलन की तैयारी में हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले किसानों को इस तरह की सौगात देकर अमरिंदर सरकार उन्हें लुभाना चाहती है। सरकार ने साल 2021-22 के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में करीब 8.5 लाख किसानों और उनके परिवारों को लाने का फैसला किया है। इस इस स्वास्थ्य योजना के लिए 'जे' फॉर्म और 'गन्ना तौल पर्ची' वाले सभी किसान मान्य होंगे। आपको बता दें कि 'जे' फॉर्म की ज़रूरत वित्त, सब्सिडी दावों और कर छूट का लाभ उठाने के लिए होती है।

पंजाब मंडी बोर्ड ने किसानों को स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से इस साल पहली बार एक खास पोर्टल शुरू किया है। अब किसानों को पहले की तरह खुद से आवेदन करने के लिए बाजार समिति कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। पंजाब मंडी बोर्ड के अध्यक्ष लाल सिंह ने रविवार को एक बयान में कहा कि बोर्ड सभी किसानों के बीमा कवर के लिए पूरे प्रीमियम का भुगतान करेगा और किसानों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी।
आयुष्मान भारत-सरबत सेवा बीमा योजना(AB-SSBY) पंजाब राज्य में लाभार्थियों के लिए प्रमुख राज्य स्वास्थ्य बीमा योजना है। यह योजना पंजाब की 75% आबादी को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगी। इस योजना में रुपये का एक पात्रता आधारित कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाता है। 5 लाख / परिवार / वर्ष। SSBY के तहत सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस और पेपरलेस उपचार का लाभ उठाया जा सकता है। 14.86 लाख SECC लाभार्थी परिवारों के लिए प्रीमियम की लागत केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा 60:40 अनुपात में वहन की जाएगी। शेष 30 लाख (लगभग) लाभार्थी परिवारों की प्रीमियम लागत पूरी तरह से राज्य द्वारा वहन की जाएगी। पंजाब सरकार की इस स्कीम से किसानों को काफ़ी फ़ायदा पहुंचने की उम्मीद है।
कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर सितंबर तक के आंदोलन की रूपरेखा बना ली है। अगस्त में होने वाले मानसून सत्र का भी कर्मचारी संगठन विरोध करेंगे। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो सत्र के दौरान पंजाब भर से एक लाख कर्मचारी चंडीगढ़ की ओर कूच करेंगे। 13 अगस्त से प्रदेश स्तरीय आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। पिछले काफी समय से कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। सरकार की ओर से कर्मचारियों को मनाने की कैबिनेट उपसमिति के जरिए बैठकें की जा रही हैं। कई दौर की वार्ता के बाद भी सरकार और कर्मचारी संगठनों में सहमति नहीं बन पा रही है। हाल ही में हुई उपसमिति की बैठक में वार्ता विफल हो जाने के बाद अब कर्मचारी संगठन बड़े आंदोलन की तैयारियों में जुट गए हैं।












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