पंजाब सरकार ने BSF का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने के केंद्र के आदेश के खिलाफ पारित किया प्रस्ताव
लुधियाना, 11 नवंबर 2021: पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने पर केंद्र सरकार को चुनौती दी थी। आज केंद्र सरकार के आदेश के खिलाफ चन्नी की अगुवाई में पंजाब सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव भी पारित कर दिया। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार की उसी अधिसूचना के खिलाफ पारित किया गया, जिसमें केंद्र ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का अधिकार क्षेत्र पंजाब में 50 किमी तक बढ़ाया था। पंजाब सरकार ने प्रस्ताव पारित करते हुए केंद्र सरकार के फैसले को पंजाब पुलिस का "अपमान" बताया और बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र के विस्तार की अधिसूचना को वापस लेने की मांग की।

केंद्र सरकार की अधिसूचना के खिलाफ प्रस्ताव पारित
आज राज्य विधानसभा के केवल दो भाजपा सदस्यों की अनुपस्थिति में सदन ने सर्वसम्मति से केंद्र के आदेश को "अस्वीकार" करने का प्रस्ताव पारित किया। बता दिया जाए कि, इसे लेकर ही पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी ने केंद्र सरकार को कुछ दिनों पहले चेतावनी दी थी। मुख्यमंत्री ने कहा था कि, केंद्र सरकार ने बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र के विस्तार को लेकर जो अधिसूचना जारी की है, उसे वो वापस ले। अगर ऐसा नहीं किया गया तो हम अपने विशेष सत्र में उसे हम रद्द करेंगे।"

पंजाब सरकार ने केंद्र के फैसले को अपमान बताया
आज वही दिन है जब, पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्र सरकार की अधिसूचना के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया। पंजाब सरकार की ओर से कहा गया कि, "पंजाब शहीदों की भूमि है। उन्होंने हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम में अनुकरणीय बलिदान दिए हैं। पंजाब पुलिस की देशभक्ति भी सबने देखी है, यह एक शक्ति है जिसने देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने में बहुत योगदान दिया है। भारत के संविधान के अनुसार, कानून और व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और इस उद्देश्य के लिए, पंजाब सरकार पूरी तरह से सक्षम है। केंद्र सरकार द्वारा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकार क्षेत्र को 15 किमी से बढ़ाकर 50 किमी करने का निर्णय राज्य पुलिस और पंजाब के लोगों के प्रति सही निर्णय नहीं था। यह हमारा भी अपमान है। .

उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा का बयान
पंजाब सरकार ने प्रस्ताव पेश करते हुए आगे कहा कि केंद्र सरकार को इतना बड़ा फैसला लेने से पहले राज्य से परामर्श करना चाहिए था, यह कहते हुए कि पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं है। पंजाब सरकार ने कहा, "पंजाब के सभी राजनीतिक दलों ने सर्वसम्मति से केंद्र सरकार के फैसले की निंदा की है और मांग की है कि केंद्र सरकार को गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना (11 अक्टूबर 2021) को वापस लेना चाहिए। इसलिए, पंजाब विधानसभा सर्वसम्मति से संकल्प करती है कि इस संबंध में केंद्र सरकार की अधिसूचना को खारिज करने वाला प्रस्ताव पारित किया जा सकता है।"

क्या बाले पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी?
उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने की केंद्र की अधिसूचना को "संघीय ढांचे पर हमला" करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सदन के सदस्यों को इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलना चाहिए। वहीं, अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने सदन को बताया कि राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार को यह निर्णय लेना चाहिए कि पंजाब पुलिस बीएसएफ के साथ 15 किमी से अधिक सहयोग नहीं करेगी। पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों का समर्थन मांगते हुए कहा कि यह एक संयुक्त लड़ाई है।
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केंद्र सरकार ने ऐसे बढ़ाया था दायरा
केंद्र सरकार ने पिछले महीने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में अंतरराष्ट्रीय सीमा से मौजूदा 15 किलोमीटर से 50 किलोमीटर के दायरे में तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी करने के लिए अधिकृत करने के लिए बीएसएफ-अधिनियम में संशोधन किया था। पंजाब सरकार इसका विरोध कर रही थी। ऐसे में केंद्र सरकार के खिलाफ पंजाब विधानसभा ने गुरुवार को सीमा सुरक्षा बल के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने वाली केंद्र की अधिसूचना के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसे राज्य पुलिस का "अपमान" बताया और केंद्र से अपना फैसला वापस लेने की मांग की है।












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