कितनी प्रॉपर्टी के मालिक हैं नवजोत सिंह सिद्धू, जो नहीं बचा पाए कांग्रेस का 'मजबूत किला'
नवजोत सिंह सिद्धू के पास 30 लाख रुपए के सोने के गहने और करीब 44 लाख रुपए की घड़ियां हैं।
चंडीगढ़:
पंजाब विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 मार्च को घोषित हुए और पूरे प्रदेश में आम आदमी पार्टी की जबरदस्त लहर दिखी। आम आदमी पार्टी ने पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 92 पर जीत हासिल की है। इस चुनाव में पंजाब लोक कांग्रेस के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह, शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल, अध्यक्ष सुखबीर बादल, पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को भी हार मिली है। हालांकि नवजोत सिंह सिद्धू के तेवर अभी भी कायम हैं और उन्होंने कहा कि जिन्होंने उनके लिए गड्ढे खोदे थे वो खुद उनसे 10 गुना ज्यादा गहरे गड्ढों में दफन हो गए। ऐसे में आइए जानते हैं कि नवजोत सिंह सिद्धू कितनी संपत्ति के मालिक हैं? id="toptextpromo"> id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'>
करीब 45 करोड़ के मालिक हैं सिद्धू
नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब की अमृतसर ईस्ट विधानसभा सीट से चुनाव लड़े थे, जहां उन्हें आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार जीवन ज्योत कौर ने 6713 वोटों के अंतर से हराया है। इससे पहले चुनाव आयोग को दिए अपने शपथ पत्र में नवजोत सिंह सिद्धू ने बताया कि उनके पास कुल 44,65,18,381 रुपए (करीब 45 करोड़) की संपत्ति है। सिद्धू और उनकी पत्नी के नाम पर 9 बैंक खाते हैं, जिनमें 73 लाख रुपए जमा हैं। नवजोत सिंह सिद्धू ने शपथ पत्र में बताया कि उनके पास 30 लाख रुपए के सोने के गहने और करीब 44 लाख रुपए की घड़ियां हैं।

सिद्धू के पास गाड़ियां कौन कौन सी हैं?
इसके अलावा नवजोत सिंह सिद्धू के पास तीन लग्जरी गाड़ियां हैं, जिनमें दो टोयोटा लैंड क्रूजर और एक फॉर्च्यूनर गाड़ी शामिल है। इन गाड़ियों की कीमत सिद्धू ने 1 करोड़ रुपए बताई है। वहीं उनकी पत्नी के पास करीब 70 लाख रुपए की गोल्ड और डायमंड ज्वैलरी है। नवजोत सिंह सिद्धू करीब 6 करोड़ रुपए की कमर्शियल बिल्डिंगों के मालिक हैं। सिद्धू और उनकी पत्नी के नाम पर तीन घर हैं, जिनकी कीमत उन्होंने 35 करोड़ 60 लाख रुपए बताई है।

सिद्धू की बेटी राबिया करती हैं मॉडलिंग
अपने बयानों से पंजाब की राजनीति में अक्सर हलचल मचाने वाले नवजोत सिंह सिद्धू की फैमिली में उनकी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू, बेटी राबिया सिद्धू और बेटा करण सिद्धू है। सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर भी 2012 में मृतसर ईस्ट सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक का चुनाव जीत चुकी हैं। हालांकि नवजोत कौर पेशे से डॉक्टर हैं। सिद्धू की बेटी राबिया मॉडलिंग करती हैं और चर्चा है कि वो जल्द ही बॉलीवुड में कदम रखने वाली हैं।

सिद्धू के गढ़ में उन्हें किसने हराया?
पंजाब में आम आदमी पार्टी की लहर के बीच नवजोत सिंह सिद्धू को भी हार का मुंह देखना पड़ा और उन्हें 'आप' प्रत्याशी जीवन ज्योत कौर ने 6713 वोटों से हराया। जीवन ज्योत कौर करीब पिछले दो दशक से सामाजिक कार्यों में जुटी हैं और पंजाब की सभी जेलों में महिला कैदियों को सैनेटरी पैड उपलब्ध कराती हैं। पंजाब में उन्हें पैड वुमन के नाम से पुकारा जाता है।

हार के बाद किसके ऊपर बरसे सिद्धू?
पंजाब चुनाव में मिली हार के बावजूद नवजोत सिंह सिद्धू के तेवर बरकरार हैं और उन्होंने नतीजों के अगले ही दिन अपने विरोधियों पर करारा हमला बोला। नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि पंजाब चुनाव में जिन लोगों ने उनके लिए गड्ढे खोदे थे, वो खुद उनसे 10 गुना ज्यादा गहरे गड्ढों में दफन हो गए। सिद्धू ने कहा कि इंसान जो बोता है, वही काटता है और पंजाब का ये चुनाव बदलाव के लिए था।

क्या चन्नी को सीएम चेहरा बनाए जाने से नाराज थे सिद्धू?
पंजाब में कांग्रेस नेताओं के बीच चुनाव से पहले ही काफी गुटबाजी देखने को मिली थी। राहुल गांधी ने जब चरणजीत सिंह चन्नी को ही पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए सीएम का चेहरा बनाने का ऐलान किया तो सूत्रों के हवाले से खबरें आईं कि सिद्धू इस फैसले से नाराज हैं। यही नहीं, प्रियंका गांधी के पंजाब दौरे के दौरान मंच पर मौजूद सिद्धू ने भाषण देने से भी मना कर दिया था। माना गया कि ऐसा करके सिद्धू ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। हालांकि चुनाव नतीजों के बाद सिद्धू ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वो इस बारे में बिल्कुल नहीं सोच रहे कि क्या पंजाब की जनता ने चन्नी को सीएम के चेहरे के तौर पर स्वीकार नहीं किया।

अब क्या होगा सिद्धू का अगला कदम
नवजोत सिंह सिद्धू ने साफ तौर पर कहा है कि उनकी पार्टी को चुनाव नतीजों पर मंथन करने की जरूरत है। आम आदमी पार्टी को जीत की शुभकामनाएं देते हुए सिद्धू ने कहा कि नए बीज बोने होंगे और नए सिरे से ही तैयारी करनी होगी। हालांकि उन्होंने अपने अगले कदम के बारे में कोई जिक्र नहीं किया। ऐसे में माना जा रहा है कि नवजोत सिंह सिद्धू फिलहाल कांग्रेस में ही रहेंगे, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर आने वाले दिनों में पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच खींचतान देखने को मिल सकती है।












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