पंजाब में कुछ सीटों पर अंतिम समय में उम्मीदवार घोषित करेगी सियासी पार्टियां, जानिए क्यों ?
पंजाब में चुनाव की तारीख़ों का ऐलान होते ही सभी सियासी पार्टियां उम्मीदवारों की घोषणा में लगी हुई है। इसी कड़ी में सियासी दलों के प्रत्याशियों के बीच बग़ावत भी देखने को मिल रहा है।
चंडीगढ़, 20 जनवरी 2022। पंजाब में चुनाव की तारीख़ों का ऐलान होते ही सभी सियासी पार्टियां उम्मीदवारों की घोषणा में लगी हुई है। इसी कड़ी में सियासी दलों के प्रत्याशियों के बीच बग़ावत भी देखने को मिल रहा है। उम्मीदवारों की सूची जारी होते ही सियासी दलों में बागियों ने झंडा बुलंद करना शुरू कर दिया है। वहीं सियासी दलों बागियों से पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचे इसके लिए रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। पंजाब में भारतीयज जनता पार्टी, शिरोमणि अकाली दल, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के अलावा विभिन्न दलों ने इसके लिए एक तोड़ निकाला है कि, वह कुछ सीटों पर अंतिम समय में उम्मीदवारों की घोषणा करें। ताकि विभन्न दलों के वोट बैंक में सेंधमारी और बागियों को साध कर सियासी फ़ायदा ले सकें।

कांग्रेस नेताओं ने भी बदली पार्टी
कांग्रेस की बात की जाए तो पहली सूची जारी होते ही टिकट के दावेदारों ने बग़ावत शुरू कर दी है। फगवाड़ा से एग्रो इंडस्ट्री के अध्यक्ष जोगेंद्र सिंह मान (जालंधर से पूर्व विधायक) टिकट नहीं मिलने की वजह से कांग्रेस का दामन छोड़ कर आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। जालंधर सेंट्रल हलके से राजिंदर बेरी को टिकट मिलने के बाद मेयर जगदीश राजा और उनके करीबी पार्षदों ने बग़ावती तेवर अपना लिया है। जालंधर कैंट से परगट सिंह को उम्मीदवार घोषित करने के करतारपुर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन राणा रंधावा और अन्य दावेदारों ने नाराज़गी ज़ाहिर की है। फिल्लौर हलके से पांच बार और करतारपुर से एक बार ( कुल छह बार विधायक रहे) सरवण सिंह ने फिल्लौर से टिकट नहीं मिलने की वजह से कांग्रेस से किनार कर लिया और शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए। आदमपुर विधानसभा से टिकट कटने के बाद मोहिंदर सिंह केपी ने भी पार्टी के खिलाफ़ बग़ावत शुरू कर दी है। मोगा से मालविका सूद को टिकट देने के बाद मोगा विधायक हरजोत सिंह कमल ने कांग्रेस को अलविदा कहते हुए भाजपा की सदस्यता ले ली।

शिरोमणि अकाली दल की भी बढ़ी मुश्किलें
शिरोमणि अकाली दल में भी टिकट के दावेदारों ने बग़ावती रुख अपना लिया है। जालंधर सेंट्रल, जालंधर कैंट, करतारपुर और शाहकोट विधानसभा सीटों पर टिकट दावेदारों ने पार्टी के ख़िलाफ़ ही मोर्चा खोल दिया है। करतारपुर के दिग्गज नेता सेठ सतपाल मल टिकट नहीं मिलने की वजह से अकाली दल को छोड़ कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। कैंट हलके अकाली दल के पूर्व विधायक सरबजीत सिंह मक्कड़ ने टिकट नहीं मिलने की वजह से भारतीय जनता पार्टी भाजपा का दामन थाम लिया है। भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है लेकिन इसके बावजूद बग़ावत के आसार दिख रहे हैं। सूत्रों की मानें तो कैप्टन और ढींढसा की पार्टी के साथ सीटों के बंटवारे से भाजपा के कई वरिष्ठ नेता नाराज़ चल रहे हैं। भाजपा में सबसे बड़ी बगावत कैंट हलके में हो सकती है क्योंकि पहले गठबंधन में यह सीट शिरोमणि अकाली दल के खाते में थी। इस बार भाजपा इस सीट पर अपना उम्मीदवार उतारेगी। यहां से भाजपा से टिकट के कई दावेदार हैं।

भाजपा में भी एक टिकट के कई दावेदार
कैंट हलके से टिकट के दावेदारों में अमित तनेजा (प्रदेश इंचार्ज, आइटी सेल), दीवान अमित अरोड़ा (प्रदेश प्रवक्ता), अमरजीत सिंह अमरी(जिला प्रधान, भाजपा देहाती), सरबजीत सिंह मक्कड़ तथा मोंटी गुरमीत सहगल का नाम शामिल है। ग़ौरतलब है कि इनमें से किसी एक को ही टिकट मिलेगा नतीजतन जिन्हें टिकट नहीं मिलेगा वह भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। इसी तरह जालंध सेंट्रल विधानसभा सीट पर कई दावेदार हैं, इनमें अनिल सच्चर(प्रदेश सचिव), शैली खन्ना (पार्षद), किशन लाल शर्मा ने टिकट की दावेदारी ठोकी । वहीं इस सीट से पिछले कई बार में मनोरंजन कालिया भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ते रहे हैं तो पार्टी उन्हें भी टिकट दे सकती है। नार्थ हलके में भी इसी तरह के हालात पैदा हो रहे हैं, वेस्ट हलके में भी भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि यहां भगत समाज का वर्चस्व है और यहां से मोहिंदर भगत के करीबी रोबिन सांपला ने चिकट की दावेदारी पेश की है। वहीं कांग्रेस के बागी मोहिंदर सिंह केपी भी टिकट की उम्मीद पर भाजपा में शामिल हुए हैं. अब अगर यहां से उन्हें ठीक देती है तो बगावत होना तय है।

आम आदमी पार्टी में भी बग़ावत
आम आदमी पार्टी भी बग़ावती तेवर का दंश झेल रही है, आप के नेताओं ने पंजाब में आम आदमी पार्टी का खुल कर विरोध करना शुरू कर दिया है। वेस्ट से टिकट के दावेदार डा. शिवदयाल माली व सेंट्रल हलके के दावेदार डा. संजीव शर्मा ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। वहीं जोगिंदर पाल ने दल बदल कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। ग़ौरतलब है कि डा. माली ने कोरोना काल से लेकर अभी तक वेस्ट हलके के साथ-साथ पंजाब के कई जिलों में दिल्ली मॉडल की तर्ज़ चुनाव प्रचार किया था। डा. संजीव शर्मा ने इसी तरह से कई इलाकों में आम आदमी पार्टी का झंडा बुलंद किया था लेकिन आप ने दोनों में से किसी को टिकट नहीं दिया। अब दोनों ने बाग़ी तेवर एखतियार कर लिए हैं। आप पंजाब के सह प्रभारी राघव चड्ढा की प्रेस कांफ्रेंस बीते दिनों दोनों ने आम आदमी पार्टी का खुलकर विरोध किया था। पंजाब सियासी पार्टियों की निगाहें एक दूसरे के बाग़ी नेताओं पर टिकी हुईं हैं। सियासी फ़ायदे के ऐतबार से सभी पार्टियां बाग़ी नेताओं को अपने साथ लाने की पुरज़ोर कोशिश कर रही है।
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