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Kejriwal Punjab: दिल्ली हारने के बाद पंजाब बचाने में यूं जुटे केजरीवाल, इन 5 चुनौतियों से कैसे निपटेगी 'आप'?

Kejriwal Punjab: दिल्ली हारने के बाद अब आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपनी पूरी ताकत पंजाब बचाने में झोंक दी है। पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में ऐतिहासिक जीत के बाद अब आप (AAP) सरकार को राज्य में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को पंजाब में आप सरकार के तीन साल पूरे होने के मौके पर केजरीवाल ने जिस तरह की बातें कही हैं, उससे साफ जाहिर होता है कि दिल्ली हारने के बाद उनके सुर बदल चुके हैं।

दिल्ली की हार के बाद पंजाब की सत्ता बचाने की यह जंग आम आदमा पार्टी की भगवंत मान सरकार के लिए आसान नहीं होगी। आइए जानते हैं कि आम आदमी पार्टी और उसके सुप्रीमो केजरीवाल के सामने पंजाब में पांच बड़ी चुनौतियां क्या होंगी, जिससे निपटन उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।

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Kejriwal Punjab: 1. पंजाब में ही सिमटी 'आप', MCD में भी पकड़ कमजोर होने से बढ़ा संकट

दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली ऐतिहासिक जीत ने आप को बड़ा झटका दिया है। इसके अलावा, दिल्ली नगर निगम (MCD) में भी आम आदमी पार्टी की पकड़ लगातार कमजोर हुई है।

अब पंजाब ही एकमात्र ऐसा राज्य बचा है, जहां आप की सरकार है। पार्टी के लिए यह एक बड़ा खतरा है, क्योंकि अगर पंजाब में भी लोगों का भरोसा डगमगाया, तो पार्टी के राष्ट्रीय मंसूबे उम्मीदों की परवान चढ़ने से पहले ही दम तोड़ सकते हैं। पंजाब के स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी की अपेक्षाकृत कमजोर परफॉर्मेंस पहले ही खतरे की घंटी बजा चुकी है।

Kejriwal News: 2. वेलफेयर योजनाओं को लेकर वादाखिलाफी के आरोप

आप की राजनीति वेलफेयर योजनाओं के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन अब पार्टी पर अपने वादों को पूरा न करने के आरोप लग रहे हैं। पंजाब में महिलाओं को हर महीने वित्तीय सहायता न दे पाने की वजह से केजरीवाल और उनकी पार्टी की विपक्षी दल बहुत ज्यादा किरकिरी कर रहे हैं। लेकिन, बार-बार के भरोसे और आश्वासनों के अलावा भगवंत मान सरकार के पाक कोई ठोस जवाब नहीं है।

AAP Punjab: 3. लॉ एंड ऑर्डर एक बड़ी समस्या

पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। हाल ही में कई हिंसक घटनाएं और गैंगस्टर अपराधों की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। पंजाब में ड्रग्स और गैंगस्टर कल्चर की समस्या को खत्म करने में सरकार अब तक कोई ठोस सफलता नहीं दिखा पाई है।

पंजाब एक बॉर्डर स्टेट है और यहां पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से कट्टरपंथी ताकतों का हौसला बुलंद हुआ है और इसके लिए आप सरकार पर आरोप भी लग रहे हैं, वह भी पार्टी के लिए बहुत बड़ी मुश्किल बन चुकी है।

Arvind Kejriwal News: 4. ड्रग्स की समस्या से निपटने में नाकामी

चुनाव प्रचार के दौरान भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल ने दावा किया था कि वे छह महीने के भीतर पंजाब को नशे की समस्या से मुक्त कर देंगे। हालांकि, तीन साल बीतने के बाद भी यह समस्या जस की तस बनी हुई है।

रविवार को अमृतसर में आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने माना है कि, "हमारा जो युवा नशे में...आज सबसे बड़ी समस्या पंजाब में नशे की है। भ्रष्टाचार की है। नशे और भ्रष्टाचार के खिलाफ अब युद्ध छेड़ दिया है पंजाब के लोगों ने। और जब एक साथ 3 करोड़ लोग पंजाब के मिल के नशे वालों के खिलाफ और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ युद्ध छेड़ेंगे..तो ये न्याय की लड़ाई है...गुरुजी महाराज से हम आशीर्वाद लेकर आए हैं कि अगले दो साल में भी हमें रास्ता दिखाएं...हमें शक्ति दें..हम राज नहीं चला रहे हम लोगों की सेवा कर रहे हैं....."

Kejriwal Punjab: 5. दिल्ली हारने के बाद साख बचाने की चुनौती

ये वही केजरीवाल हैं, जिनका दिल्ली विधानसभा का वह भाषण आज भी सोशल मीडिया पर वायरल होता रहता है, जब वह ताल ठोककर खुद को 'दिल्ली के मालिक' बता रहे थे। लेकिन, दिल्ली में करारी हार के बाद उन्हें यह मजबूरन कहना पड़ रहा है कि वे 'राज नहीं चला रहे' जनता की सेवा कर रहे हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली हार से आप के राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। पार्टी के लिए अब पंजाब की सत्ता को बचाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। यही वजह है कि होशियारपुर में 10 दिवसीय विपश्यना के बाद उन्होंने राज्य की सियासी गतिविधियों में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

इसी कड़ी में उन्होंने अमृतसर में उन्होंने स्वर्ण मंदिर, दुर्गियाना मंदिर और वाल्मीकि तीर्थ स्थल में दर्शन कर जनता को यह संदेश देने की कोशिश की कि वे पंजाब के विकास के लिए अब पूरी तरह से समर्पित हैं।

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