गुजरात चुनाव में क्यों अहम कड़ी साबित हो रहे हैं पंजाब के सीएम भगवंत मान
चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान मौजूदा दौर में राष्ट्रीय नेताओं के चेहरों में से एक हैं। आम आदमी पार्टी में संयोजक अरविंद केजरीवाल के बाद भगवंत मान दूसरे नंबर पर आए तो अतिशयोक्ती नहीं होगी। क्योंकि गुजरात चुनाव में इसका जीता जागता उदाहरण मिल चुका है। जब से पंजाब में आप की सरकार बनी है फैसलों के मामले में भगवंत मान लगातार सुर्खियों में बन हुए हैं।

एक तरफ जहां विपक्ष मान सरकार को घेरने में लगी है, लेकिन अपने फैसलों से भगवंत मान लगातार भारी पड़ते नजर हैं। गुजरात चुनाव प्रचार से लेकर सूबे में कानून व्यवस्था तक मान सरकार हर फैसले पर बुलंद तरीके से खड़ी नजर आ रही है। दूसरी तरफ सीएम मान की रैलियों में उमड़ी भीड़ से इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि मान आम आदमी पार्टी के उन राष्ट्रीय चेहरों में से एक हैं, जिन्हें भारत के लोग पहचानते हैं। यही कारण है कि भगवंत मान पर आम आदमी पार्टी भरोसा कर रही है।
दूसरी तरफ भगवंत मान ने पार्टी के लिए गुजरात चुनाव में अपनी पूरी जान झोंक दी है। अपने अथक प्रचार के जरिए वो मतदाताओं को लुभाते में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं और एक दिन में 10-10 रैलियाों को संबोधित कर रहे हैं।
गुजरात में भगवंत मान का प्रभाव
दरअसल, गुजरात में लगभग 50,000 की एक छोटी-सी सिख आबादी है जो कच्छ, वडोदरा और सूरत के गांधीधाम, लखपत क्षेत्रों में केंद्रित है, जिनमें से कुछ को मान ने अपने अभियान में शामिल किया है। इसके अलावा भावनगर, अहमदाबाद, जामनगर, वलसाड, नवसारी और वापी में भी सिख आबादी फैली हुई हैं।
केजरीवाल के बाद स्टार प्रचारक बन चुके हैं मान
आप नेताओं के मुताबिक पार्टी के लिए मान की अहमियत बहुत गहरे स्तर पर है। केजरीवाल के बाद मान पार्टी के लिए एक ब्रांड एंबेसेडर के समान हैं, जिन्होंने सत्ता में आने के 6 महीने के भीतर पंजाब में काफी विकास और पार्टी के वादों को पूरा किया है। क्योंकि जब मान जनसभा में लोगों को बताते हैं कि उनकी सरकार ने नौकरियों से लेकर पुरानी पेंशन बाहल की है। साथ ही मुफ्त बिजली दी है तो यह काफी मायने रखता है।












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