Farmers Protest: सतनाम सिंह पन्नू कौन है जिसने पंजाब सरकार को दी धमकी? किसान आंदोलन से क्या है रिश्ता?

Farmers Protest: शंभू और खनौरी बॉर्डर से प्रदर्शनकारी किसानों को हटाए जाने के बाद किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के सतनाम सिंह पन्नू ने इस कार्रवाई के लिए केंद्र और पंजाब सरकार दोनों की निंदा की है।

किसान मोर्चा के नेता ने कहा कि आज वे किसानों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ हरियाणा और पंजाब में डिप्टी कमिश्नर के दफ्तरों के बाहर धरना-प्रदर्शन करेंगे।

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Farmers Protest: 'पंजाब सरकार को भारी कीमत चुकानी होगी, सतनाम सिंह पन्नू

सतनाम सिंह पन्नू ने एक वीडियो जारी करके सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि वो सरकार द्वारा किसानों के खिलाफ की गई कार्रवाई की निंदा करते हैं। भगवंत मान सरकार और मोदी सरकार को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। आज हम किसानों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ हरियाणा और पंजाब में डिप्टी कमिश्नर के दफ्तरों के बाहर धरना-प्रदर्शन करेंगे।'

Who is Satnam Singh Pannu: कौन है सतनाम सिंह पन्नू ? किसान आंदोलन से क्या है नाता?

कहीं आप 2020 में दिल्ली में हुए किसान आंदोलन भूल तो नहीं गए ? इस आंदोलन में एक चेहरा सबसे ज्यादा हाइलाईट हुआ था जिसने किसान आंदोलन को हिंसक बनाने में मुख्य भूमिका निभाई थी। ये नाम है सतनाम सिंह पन्नू का जिन्होंने आज पंजाब और केंद्र सरकार को ये धमकी भरी चेतावनी दी है। सतनाम सिंह पन्नू और उनकी किसान मजदूर संघर्ष समिति के सदस्यों को पुलिस बैरिकेड तोड़ने और दूसरे किसानों को उकसाने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।

दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान सतनाम सिंह पन्नू और बूटा सिंह बुर्ज के 'दिल्ली कूच' के अहवान पर ही प्रदर्शन कर रहे किसानों ने ट्रैक्टर के साथ दिल्ली की ओर आगे बढ़े थे। इन दोनों नेताओं पर आरोप था कि उनके भड़काऊ भाषणों ने किसानों को उकसाया और वो दिल्ली पुलिस की तमाम सुरक्षा तैयारियों को तोड़ते हुए लाल किला तक पहुंच गए थे।

Farmers Protest: हिंसा ना भड़काने की ली थी गारंटी

दिल्ली पुलिस के रडार पर किसान आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में तमाम नेताओं में सबसे ऊपर नाम सतनाम सिंह पन्नू का ही था। यह वही किसान नेता हैं जिन्होंने दिल्ली में किसान ट्रैक्टर रैली निकाला था और अशांति ना फैलाने की गारंटी ली थी। हालांकि, स्थिति काफी बदल गई और इसके लिए पन्नू को जिम्मेदार ठहराया गया था।

दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने प्रेस-कांफ्रेंस में खुलेआम तौर पर नाम लिया था। पुलिस आयुक्त ने उस दौरान कहा था कि, यह किसान नेता लिखित गारंटी लेने के बाद भी वायदे से मुकर गये और सतनाम सिंह पन्नू ने तो बाकायदा सिंघु बार्डर पर किसानों के बीच खुलेआम भड़काऊ भाषण तक दिये जो ट्रैक्टर रैली में हिंसा फैलाने के लिए आग में घी का काम कर गये।

बता दें कि, 2020 में जनवरी में हुए किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली के अलावा देश के कई हिस्सों मे किसान कृषि कानून के खिलाफ सड़कों पर उतरे थें। हालांकि, दिल्ली में स्थिति काफी हिंसक हो गई थी। किसान नेताओं के भड़काऊ बयानों ने आंदोलनकारी किसानों को और बेकाबू किया जिससे वो लोग लाल किले पर चढ़ाई की थी।

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