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पंजाब चुनाव: अमृतसर पूर्व विधानसभा का चुनावी इतिहास, क्या सिद्धू को मिलेगी अपने ही गढ़ में मात ?

पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र अमृतसर पूर्व विधानसभा हॉट सीट मानी जा रही है। इस सीट को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू का गढ़ माना जाता है।

चंडीगढ़, 29 जनवरी 2022। पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र अमृतसर पूर्व विधानसभा हॉट सीट मानी जा रही है। इस सीट को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू का गढ़ माना जाता है। 2017 के विधानसभा चुनाव में नवजोत सिंह सिद्धू ने भाजपा के राजेश कुमार हनी को 42 हज़ार 809 वोटो हराकर जीत दर्ज की थी। अमृतसर पूर्व विधानसभा सीट के चुनावी इतिहास की बात की जाए तो यहां 1951 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुआ था। शिरोमणि अकाली दल के सरूप सिंह ने जीत दर्ज की थी। उसके बाद 1957, 1962 और 1967 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनसंघ के बलदेव प्रकाश लगातार तीन बार अमृतसर पूर्व सीट से विधायक चुने गए थे। 1969 में कांग्रेस के ज्ञान चंद खरबंदा ने जीत दर्ज की उसके 1972 में भी उन्होंने ने ही जीत दर्ज की थी। 2012 में भाजपा की नवजोत कौर सिद्धू ( नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी) ने जीत दर्ज की थी। वहीं 2017 में कांग्रेस से नवजोत सिंह सिद्धू ने जीत दर्ज की थी।

अमृतसर में कांग्रेस की सियासी पकड़ मज़बूत

अमृतसर में कांग्रेस की सियासी पकड़ मज़बूत

अमृतसर पूर्व विधानसभा सीट अमृतसर लोकसभा क्षेत्र में आती है, यहां से कांग्रेस पार्टी से गुरजीत सिंह औजला सांसद हैं। भारतीय जनता पार्टी के हरदीप पुरी को 99 हज़ार 626 वोटों से हराकर जीत दर्ज की थी। ग़ौरतलब है कि अमृतसर में कांग्रेस की पकड़ अच्छी है। इसके साथ ही अमृतसर पूर्व नवजोत सिंह सिद्धू का गढ़ माना जाता है लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव में सिद्धू की राह आसान नहीं लग रही है। इस बार अमृतसर पूर्व सीट से सिद्धू के ख़िलाफ़ शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया चुनावी मैदान में उतरे हैं। वहीं भाजपा की टिकट पर प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने वाले तमिलनाडु कैडर के वरिष्ठ अधिकारी जगमोहन सिंह राजू चुनावी मैदान में हैं। वहीं आम आदमी पार्टी की तरफ़ से जीवनजोत कौर चुनावी रण में हैं।

‘पंजाब कई पहलुओं में पिछड़ चुका है’

‘पंजाब कई पहलुओं में पिछड़ चुका है’

अमृतसर पूर्व विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार जगमोहन सिंह राजू की बात की जाए तो वह तमिलनाडु के एडिश्नल चीफ सेक्रेटरी के पद पर तैनात थे। उन्होंने पंजाब के हालात को देखते हुए इस्तीफ़ा देकर राजनीति में क़दम रखा है। उन्होंने बताया कि साल 1980 में ही वह पंजाब से तमिलनाडु के लिए निकल गए थे। उस वक़्त पंजाब की हालत ठीक थी लेकिन अब पंजाब कई पहलुओं पर बुरी तरह से पिछड़ चुका है। जिसमे आर्थिक विकास, कृषि की स्थिति, सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे अहम हैं। बीजेपी उम्मीदवार घोषित होने से पहले उन्होंने कहा था कि वह किसी भी पार्टी के साथ काम करने के लिए तैयार हैं, जो केंद्र में सत्ता में हो। उनका मानना है कि पंजाब का विकास केंद्र और राज्य के तालमेल से मुमकिन है।

सिद्धू ने मजीठिया को किया चैलेंज

सिद्धू ने मजीठिया को किया चैलेंज

शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया अमृतसर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के अलावा मजीठा सीट से भी चुनावी मैदान में हैं। पंजाब के सियासी गलियारों में यह चर्चा ज़ोरों पर है कि बिक्रम सिंह मजीठिया अमृतसर पूर्व से सिर्फ़ नवजोत सिंह सिद्धू के अहंकार को तोड़ने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं अमृतसर पूर्व से पर्चा दाखिल करने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने शिअद नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को ललकारते हुए कहा कि मजीठिया में अगर दम और लोगों पर विश्वास है तो मजीठा को छोड़कर सिर्फ़ अमृतसर पूर्व सीट से चुनाव लड़ें। बिक्रम सिंह मजीठिया के सियासी सफ़र की बात की जाए तो उन्होंने पहली बार 2007 के विधानसभा चुनाव में मजीठा विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की थी। 2012 के विधानसभा चुनाव में दोबारा से मजीठा सीट से ही चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें पंजाब कैबिनेट में शामिल किया गया। वह पूर्व राजस्व, पुनर्वास व आपदा प्रबंधन, सूचना व जनसंपर्क और गैर पारंपरिक ऊर्जा मंत्री भी रहे हैं।


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