Digital Arrest: चंडीगढ़ में रिटायर्ड कर्नल से ₹3.4 Cr की ठगी, 10 दिन तक चंगुल में रहे दंपति, जानें कैसे फंसे
Digital Arrest: लखनऊ के बाद चंडीगढ़ में अब 'डिजिटल अरेस्ट' का मामला सामने आया है। भारतीय सेना के रिटायर्ड कर्नल दलीप सिंह और उनकी पत्नी साइबर जालसाजों के शिकार हो गए। प्रवर्तन निदेशालय (ED) अधिकारी बनकर जालसाजों ने 82 वर्षीय दंपति से 3.4 करोड़ रुपये ठग लिए।
ठगों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर 10-12 दिनों तक डिजिटल रूप से कैद (Digital Arrest) कर रखा। मीडिया से बातचीत में रिटायर्ड कर्नल का दर्द सामने आया। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मदद और अपनी रकम वापसी कराने की अपील की। आइए जानते हैं कैसे एक रिटायर्ड कर्नल ठगों के झांसे में फंसा...

कैसे हुआ 'डिजिटल अरेस्ट' ?
18 मार्च को व्हाट्सएप कॉल के जरिए जालसाजों ने कर्नल दलीप सिंह से संपर्क किया। फर्जी क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर कहा कि वह एक 5038 करोड़ के घोटाले में फंस चुके हैं। आरोप लगाया कि उन्होंने अपना अकाउंट 5 लाख रुपये में बेचा और 2 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग के लिए 20 लाख रुपये कमीशन लिया। वीडियो कॉल पर उनका एटीएम कार्ड दिखाया और धमकाया कि उनके खिलाफ जांच हो रही है। 10 दिनों तक दंपति को घर में रहने और किसी से संपर्क न करने की धमकी दी गई। जालसाजों ने धीरे-धीरे 3.4 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
क्या बोले रिटायर्ड कर्नल?
रिटायर्ड कर्नल ने बयां किया अपना दुख। बताया कि '18 मार्च को हमें खुद को क्राइम ब्रांच मुंबई कहने वाले एक संगठन से वीडियो कॉल आया। उन्होंने कहा कि वे नरेश गोयल नामक एक व्यक्ति द्वारा लगाए गए आरोप की जांच कर रहे हैं, जो पहले से ही मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद है, जो मनी लॉन्ड्रिंग के सिलसिले में मेरा नाम भी शामिल करना चाहता था। मैंने कहा कि मैं नरेश को नहीं जानता। मेरा उससे कोई संपर्क नहीं है... इसके बाद, उन्होंने कहा कि उन्हें हमारे खातों की जांच करनी है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हमने सुप्रीम कोर्ट को जो रिपोर्ट दी है वह पूरी है... मैंने उन्हें अपने सभी खाता नंबर दिए... इसके बाद, उन्होंने मुझे 15 सवालों की प्रश्नावली भेजी, जिसके जवाब नरेश गोयल नामक व्यक्ति ने दिए थे।
आगे बताया कि वे मेरी टिप्पणी चाहते थे, जो मैंने दी, और मैंने उन्हें बताया कि यह सब झूठ है... उन्होंने 20 मार्च को पैसे मांगना शुरू किया और कहा कि वे हमारे हितों की रक्षा के लिए ऐसा कर रहे हैं, ताकि कोई हमें धमकाकर बैंक से हमारे पैसे न निकाल सके। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एक अन्य परिवार जिसने नरेश गोयल के खिलाफ सबूत देने में सहयोग नहीं किया था, उसके पूरे परिवार को मार दिया गया... (वीडियो कॉल) लगातार चल रही थी, और उन्होंने हमें दिन-रात अपने फोन बंद न करने को कहा... उन्होंने पूछा कि क्या हम किसी से मिले हैं... हमने कुछ भी नहीं बताया क्योंकि हम अपने परिवार के सदस्यों को कोई नुकसान नहीं पहुँचाना चाहते थे... उन्होंने हमसे 3.4 करोड़ रुपये ले लिए'
पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
एसपी साइबर क्राइम गीतांजलि खंडेलवाल ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। उन्होंने पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी और हमने तुरंत इस पर कार्रवाई की। हमने राशि को फ्रीज कर दिया, जो हम तुरंत कर सकते थे। चूंकि राशि का लेन-देन 10-12 दिनों की अवधि में अलग-अलग तरीके से किया जा रहा था। इस मामले में, राशि को देश भर के विभिन्न खातों में भेजा गया और चेक का उपयोग करके भुनाया गया। हम ट्रेस पर काम कर रहे हैं।
ठगी के ऐसे और भी मामले
ऐसे ही एक मामले में लखनऊ में डॉक्टर रुचिका टंडन से भी 2.81 करोड़ रुपये ठग लिए गए। सीबीआई अधिकारी बनकर उन्हें वीडियो कॉल किया गया। जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग केस में नाम आने की धमकी दी गई। डराकर अलग-अलग खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।
कैसे बचें ऐसी ठगी से?
- कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल या व्हाट्सएप पर संपर्क नहीं करती।
- अगर कोई भी व्यक्ति बैंक, CBI, ED या पुलिस अधिकारी बनकर कॉल करे तो तुरंत साइबर सेल से संपर्क करें।
- अपने बैंक खातों की जानकारी किसी अजनबी को न दें।
- अगर डिजिटल अरेस्ट जैसी धमकी मिले तो घबराएं नहीं, सीधे पुलिस को सूचित करें।
- बड़े लेन-देन से पहले बैंक और कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लें।
यह 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी का नया तरीका बनता जा रहा है, जिससे बचने के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है।












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