पंजाब: सुच्चा सिंह छोटेपुर के शिरोमणि अकाली दल में शामिल होने के बाद से बदली सियासी फ़िज़ा, जानिए कैसे ?
पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर आए दिन सियासी समीकरण बदलते हुए नज़र आ रहे हैं। सभी सियासी पार्टी चुनावी रण में सियासी ज़मीन मज़बूत करने में जुटी हुई है।
चंडीगढ़, 10 दिसंबर 2021। पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर आए दिन सियासी समीकरण बदलते हुए नज़र आ रहे हैं। सभी सियासी पार्टी चुनावी रण में सियासी ज़मीन मज़बूत करने में जुटी हुई है। वहीं विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी को एक और झटका मिला है। आम आदमी पार्टी भी पंजाब में अपनी सियासी पकड़ मजबूत करने में जुटी हुई है। वहीं दूसरी तरफ़ पार्टी की शाख कमज़ोर होती जा रही है। कभी सुच्चा सिंह छोटेपुर आम आदमी पार्टी के दिग्गज़ चेहरा माने जाते थे लेकिन आम आदमी पार्टी ने 2017 में उन्हें टिकट देने के एवज़ में पैसा लेने के आरोप में पार्टी से निकाल दिया था। हाल ही में सुच्चा सिंह छोटेपुर ने शिरोमणि अकाली दल का दामन थाम लिया है।

AAP और कांग्रेस के लिए चुनौती
सुच्चा सिंह छोटेपुर के शिरोमणि अकाली दल में शामिल होने की वजह से पंजाब में सियासी समीकरण किस तरह से बदल सकते हैं। आज हम आपको इसके बारे में बताने जा रहे हैं। गुरूवार को सुच्चा सिंह छोटेपुर के शिरोमणि अकाली दल में शामिल होते ही शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें शिअद का वाइस प्रेसिडेंट बना दिया साथ ही बटाला विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार भी घोषित कर दिया। शिरोमणि अकाली दल में सुच्चा सिंह छोटेपुर के आने से माझा क्षेत्र में शिअद को मजबूती मिल सकती है। वहीं सुच्चा सिंह छोटेपुर पंजाब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के लिए माझा रीजन में चुनौती साबित हो सकते हैं।

AAP पंजाब के संयोजक भी रहे चुके हैं सुच्चा सिंह
आम आदमी पार्टी पंजाब इकाई के सुच्चा सिंह छोटेपुर संयोजक भी रह चुके हैं। 2014 लोकसभा चुनाव में पंजाब में आम आदमी पार्टी की सियासी ज़मीन मजबूत करने में सुच्चा सिंह छोटेपुर का अहम योगदान रहा है। आम आदमी पार्टी ने पंजाब में 2014 लोकसभा का चुनाव उन्ही के नेतृत्व में लड़ा था और माझा रीजन से तीनों सीटों पर जीत दर्ज की थी। जिस वजह से पंजाब की सियासी सरगर्मियां काफ़ी बढ़ गई थीं और उसी वक़्त से माझा क्षेत्र में सुच्चा सिह छोटेपुर को सियासी फिज़ा बदलने वाले नेताओं में शुमार किया जाता रहा है। आम आदमी पार्टी 2017 में भी विधानसभा चुनाव उन्ही के नेतूत्व में लड़ने की तैयारी कर रही थी लेकिन उनपर चुनाव से पहले ही टिकट के अवज़ में पैसे लेने के आरोप लग गए थे। इसी वजह से उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था।

सरपंच पद से की थी सियासी सफर की शुरुआत
पंजाब में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सुच्चा सिंह छोटेपुर राजनीति में सक्रिय हो गए हैं। छोटेपुर के राजनीति में सक्रिय होते ही शिरोमणि अकाली दल में शामिल होने से आम आदमी पार्टी की सियासी पकड़ ढीली हो सकती है। ग़ौरतलब है कि सुच्चा सिंह छोटेपुर मे 1975 में सरपंच पद से सियासी पारी की शुरुआत की थी। पहली बार 1985 में गुरुदासपुर के धालीवाल विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे। सुरजीत सिंह की सरकार में स्वास्थ्य और पर्यटन मंत्री भी रहे थे लेकिन ऑपरेशन ब्लू स्टार के खिलाफ उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था। 2002 में वह बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी रण में उतरते हुए जीत दर्ज की थी। सुच्चा सिंह छोटेपुर की माझा रीजन में अच्छी पकड़ है। सियासी जनाकारों की मानें तो इस रीजन में उनके जैसा दूसरा दिग्गज चेहरा कोई और नहीं है। वह अपने दम पर किसी भी सियासी पार्टी को जीत दिला सकते हैं।
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