पंजाब में सियासी ज़मीन मज़बूत करने में जुटी AAP, कांग्रेस को एक और बड़ा झटका
पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर जहां सभी सियासी पार्टियां अपनी राजनीतिक पकड़ मज़बूत करने में जुटी है वहीं अब पंजाब कांग्रेस में मचे सियासी घमासान के बीच अब पार्टी भी टूटने लगी है।
चंडीगढ़, 9 नवम्बर 2021। पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर जहां सभी सियासी पार्टियां अपनी राजनीतिक पकड़ मज़बूत करने में जुटी है वहीं अब पंजाब कांग्रेस में मचे सियासी घमासान के बीच अब पार्टी भी टूटने लगी है। एक तरफ़ कांग्रेस की सियासी पकड़ ढीली होती जा रही है तो वहीं आम आदमी पार्टी की सियासी ज़मीन मज़बूत होती जा रही है। आज कांग्रेस को एक और झटका लगा है। पंजाब कांग्रेस को अलविदा कहते हुए रमन बहल ने आम आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया है। आपको बता दें कि रमन बहल पंजाब अधीनस्थ्य सेवाएं चयन बोर्ड में बतौर चेयरमैन कार्यरत थे लेकिन उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और कांग्रेस पार्टी का भी साथ छोड़ दिया है।

AAP में शामिल हुए रमन बहल
रमन बहल कई सालों से गुरदासपुर शहर और सीमावर्ती जिले की सेवा कर रहे थे। आज उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोड़ आप की झाड़ू पकड़ ली। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता भगवंत मान और राघव चड्ढा ने रमन बहल को आम आदमी पार्टी में शामिल किया। रमन बहल ने कहा कि अब पंजाब की पारंपरिक पार्टियां और कांग्रेस की राजनीति जन हितैषी नहीं रही। आज कांग्रेस पार्टी और सरकार पर सत्ता और पैसे का बोलबाला है। लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं रही। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि बाहर से आए हुए लोगों ने पार्टी का व्यापारीकरण कर दिया है। टकसाली कांग्रेसियों को महत्व नहीं दिया जा रहा है। ग़ौरतलब है कि रमन बहल कांग्रेस के तीसरे ऐसे हिंदू नेता है जिन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ा है। इससे पहले डा. मोहिंदर रिणवा फाजिल्का से और हंस राज जोशन जलालाबाद से कांग्रेस पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं।

गुरदासपुर में बदल सकते हैं समीकरण
रमन बहल के आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद गुरदासपुर के सियासी समीकरण बदलने के क़यास लगाए जा रहे हैं। आपको बता दें कि रमन बहल खुद 2 बार नगर परिषद गुरदासपुर के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके हैं। वहीं उनके पिता स्व. खुशहाल सिंह बहल 4 बार विधायक रहने के साथ-साथ ज्ञानी जैल सिंह, हरचरण सिंह बराड़ और कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ 3 बार कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। रमन बहल एक वकील भी हैं और उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी औऱ गुरु नानक यूनिवर्सिटी से सैनेट मेम्बर के तौर पर भी काम किया है। इसके साथ ही रमन बहल पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव भी रह चुके हैं।रमन बहल के दादा स्व. गोपाल दास बहल ने 1922 में लाल लाजपत राय की गुरदासपुर दौरे दौरान उन्होंने अंग्रेजी और फैंसी पोशाक छोड़कर खादी पहनना शुरू कर दिया था तथा उस दिन से ही बहल परिवार ने आजादी संग्राम में योगदान डालने के साथ-साथ समाज सेवा करनी शुरू की। लंबे समय तक लोगों की सेवा करने के अलावा परिवार कांग्रेस पार्टी से जुड़ा रहा।

कांग्रेस के लिए चुनौती
सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि रमन बहल गुरदासपुर सीट से टिकट के दावेदार हो सकते हैं। यहां से बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा विधायक है। पाहड़ा उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के खासे करीबी हैं। बहल ने पद से इस्तीफा देने के बाद कहा कि टकसाली कांग्रेसियों को पार्टी में महत्व नहीं दिया जा रहा है। वह टकसाली कांग्रेसी है लेकिन उन्हें अब सोचना पड़ रहा है। उनके इस बयान से साफ लग रहा है कि वह कांग्रेस से काफ़ी नाराज़ हैं। इसी वजह से उन्होंने आम आदमी पार्टी का दामन थामा है। आगामी चुनाव में वह गुरदासपुर से कांग्रेस उम्मीदवार के लिए चुनौती बन सकते हैं।
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