गंवई अंदाज, खास हेयर स्टाइल और भोली सूरत वाले लालू का खुला राज

Lalu Prasad
पटना। बिहार की सत्ता पर 15 वर्षो तक काबिज रहे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद सोमवार को करोड़ों रुपये के चारा घोटाले के एक मामले में दोषी करार दे दिए गए। किसी को यकीन नहीं था, खुद लालू भी आश्वस्त थे कि कांग्रेस का साथ देना ऐन वक्त पर काम आएगा, मगर वर्षो तक सीबीआई की फाइलों में छिपा राज आखिर खुल ही गया। लालू भले ही सीखचों के पीछे चले जाएं, लेकिन अपने गंवई अंदाज, खास हेयर स्टाइल, भोली-भाली सूरत और मसखरेपन के लिए याद किए जाएंगे, उनके बगैर संसद में ठहाकों की गूंज अब शायद ही कभी सुनाई दे।

लालू नाम में ही कुछ खास था कि उनके नाम के खिलौने तक बिकने लगे। 'माई' समीकरण यानी मुस्लिम और यादव मतों की गोलबंदी की बदौलत वर्षो तक शासन चलाने वाले लालू बिहार की राजनीति तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी उनकी दखल बढ़ी। दामन पर चारा घोटाले का दाग लगने से पहले 'गरीबों का मसीहा' की छवि वाले लालू जब रेल मंत्री बने तो देश में रेल की पटरियों पर 'गरीब रथ' दौड़ने लगे।

रेलगाड़ियों में मिट्टी के कुल्हड़ों में चाय बिकने लगी। लालू रेलवे को हमेशा फायदे में बताते रहे, कभी रेल किराया नहीं बढ़ाया, उनके रेल मैनेजमेंट को एक करिश्मा बताया जाने लगा, कई मैनेजमेंट संस्थानों में उन्हें गुर सिखाने के लिए बुलाया जाने लगा। उनकी लोकप्रियता देख ममता बनर्जी ने भी उनका अनुसरण किया। रेलवे मगर खस्ताहाल होता गया और 10 साल बाद किराये बढ़ाना मजबूरी बन गई। देहाती अंदाज में अपने बयानों से विपक्षी नेताओं की बोलती बंद कर देने वाले लालू प्रसाद का जन्म 11 जून, 1948 में बिहार के गोपालगंज जिले के फुलवरिया गांव में एक निर्धन परिवार में हुआ था।

आज उनकी संपत्ति का अंदाजा लगाना तक आसान नहीं है। अपनी प्रारंभिक शिक्षा गोपालगंज में पूरी कर उच्च शिक्षा के लिए लालू पटना आ गए। पटना में वह अपने बड़े भाई, जो वेटरीनरी कॉलेज में चपरासी पद पर कार्यरत थे, के साथ रहने लगे और पटना के बी़ एऩ कॉलेज में पढ़ाई करने लगे। लालू ने राजनीति शास्त्र में स्नातकोतर और लॉ की डिग्री हासिल की। इसी दौरान उनकी दिलचस्पी राजनीति की ओर गई और वर्ष 1970 में पटना विश्वविद्यालय में छात्र संघ के महासचिव चुने गए। इसके बाद राजनीति में उनकी दिलचस्पी बढ़ती चली गई।

आपातकाल के दिनों में जब जय प्रकाश नारायण ने आंदोलन प्रारंभ किया तो उन्होंने पिछड़े और गरीबों के बीच खास छवि बनानी प्रारंभ कर दी। इसी क्रम में उन्होंने राम मनोहर लोहिया के समाजवाद को भी अपनाया और गरीबों में अपनी खास पहचान छोड़ी। जयप्रकाश के संपूर्ण क्रांति आंदोलन के रथ पर सवार होकर 29 वर्ष की उम्र में ही 1977 में पहली बार जनता पार्टी के टिकट से लालू संसद में पहुंच गए। वर्ष 1973 में राबड़ी देवी के साथ परिणय सूत्र में बंधे। लोगों की नब्ज पहचानने में माहिर लालू ने 90 के दशक में मंडल कमीशन को भांपकर गरीबों का मसीहा का रुतबा हासिल किया और फिर बिहार की सत्ता पर 1990 में काबिज हो गए।

वर्ष 1997 में लालू जनता दल से अलग हो गए और उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल बनाया और पार्टी के अध्यक्ष बने। वर्ष 1997 में ही चारा घोटाले का आरोप लगा, जबकि 2000 में आय से ज्यादा संपत्ति अर्जित करने का आरोप भी उन पर लगा। लालू-राबड़ी शासन में बिहार में विकास का कोई कार्य नहीं हुआ। कहीं एक सड़क तक नहीं बनी, अलकतरा घोटाला हो गया।

धीरे-धीरे जनता का मोहभंग होने लगा और गरीबों के मसीहा का राज लोग जान गए। आठ बार विधानसभा के सदस्य रह चुके लालू की पार्टी को जनता ने 2005 में बिहार की सत्ता से बेदखल कर दिया। वर्ष 2004 से 2009 तक लालू ने देश के रेल मंत्रालय का दायित्व संभाला। लालू की सात पुत्रियां और दो पुत्र हैं। क्रिकट खेल में रुचि के कारण वर्ष 2001 में लालू बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष बने।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+