बिहार की लाइफलाइन के लिये केंद्र ने दिये 1442 करोड़
पटना। उत्तरी तथा दक्षिणी बिहार की लाइफ लाइन कहे जाने वाला महात्मा गांधी सेतु पुल फिर से चमचमा उठेगा। उसी के समांतर एक और पुल खड़ा होगा और पटना की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया जायेगा। यह सब इसलिये संभव होगा, क्योंकि मोदी सरकार ने बिहार को 1742 करोड़ रुपए का तोहफा दिया है।
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आपको बताते चलें कि पिछले कई वर्षों से महात्मा गांधी सेतु पुल क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण लोगों को आने जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। जिसे देखते हुए केंद्र सरकार ने उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले महात्मा गांधी सेतु पुल के पुनर्निर्माण संबंधी परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है।
क्या क्या कार्य होंगे इस पुल के लिये
- सबसे पहले जर्जर हो चुके इस पुल को ढहाया जाएगा।
- जिस मार्ग पर पुल है उसी मार्ग पर स्टील ट्रस्ट के साथ इसकी री-डैंकिंग की जाएगी।
- सूत्रों का कहना है कि लोहे के इस पुल का निर्माण कोलकाता के हावड़ा ब्रिज की तर्ज पर हो सकता है।
- इस नये पुल का नाम भी महात्मा गांधी सेतु ही रखा जायेगा।
- सरकार ने इस निर्माण को पूरा करने के लिये राज्य को 3 साल का समय दिया है।
- बिहार सरकार इस नये पुल का निर्माण ढाई वर्ष में ही पूरा करने की तैयारी में है।
- इसी फूल से 40 मीटर दूर एक और नया पुल का निर्माण किया जायेगा।
- नये पुल का मार्ग अगर किसी कारणवश बंद होता है, तो भी बिहार की रफ्तार रुकेगी नहीं। इसी उद्देश्य से दूसरा पुल बनेगा।
महात्मा गांधी सेतु के बारे में खास बातें
> पटना में गंगा नदी के ऊपर चार लेन वाले महात्मा गांधी सेतु का निर्माण 1980 के दशक में बिहार की राज्य सरकार ने किया था।
> बदहाल हालत में पहुंच चुका यह पुल उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच बहुत ही महत्वपूर्ण कड़ी है और कई आर्थिक, साथ ही साथ सामाजिक, राजनीतिक गतिविधियों का मार्ग भी है।
> नेपाल और भूटान का कारोबार भी इसी संपर्क के माध्यम से होता है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय पिछले 15 वर्षों से इस पुल के पुनर्निर्माण के प्रयास कर रहा है, लेकिन उसके प्रयास सफल नहीं हो सके हैं।
> राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा काफी अध्ययन किए जाने बाद अब यह तय किया गया कि इस पुल की मौजूदा संरचना को ढहाया जाए और उसके बाद स्टील ट्रस के साथ इसकी री-डैकिंग की जाए।
क्या बोले गडकरी
दिल्ली में हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामले की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में लिए गए फैसले के बारे में जानकारी देते हुए सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि दक्षिण और उत्तर बिहार की इस लाइफ लाइन की देखभाल के लिए केंद्र सरकार ने 200 करोर रुपए बिहार सरकार को दिए थे। लेकिन निर्माण संबंधी खामियों और राज्य सरकार की घोर अनदेखी के कारण यह पुल जर्जर हो चुका है।
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इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए गडकरी ने कहा कि बिहार के सांसद इस पुल को लेकर काफी चिंतित थे। यह एक संवेदनशील मुद्दा बन गया था। साथ ही उन्होंने दावा किया है कि भाजपा भले ही राज्य की सत्ता में नहीं आ पाई, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार की जनता से चुनाव के दौरान पैकेज का जो वादा किया था उसके तहथ सारे कार्य पूरे किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि दो साल में केंद्र सरकार 84000 करोड रुपए का काम करेगी और 5 साल में लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपए का काम होगा।












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