58 लोगों का कोई हत्यारा नहीं, बाथे नरसंहार के सभी 26 आरोपी बरी

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पटना। जिस नरसंहार को तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने राष्ट्रीय शर्म कहा था और जिस नरसंहार से पूरा देश हिल गया था, एक साथ 58 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया, इसके सभी अभियुक्तों को पटना हाइकोर्ट ने बरी कर दिया।

बिहार के जहानाबाद के पास लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार केस में सभी 26 आरोपी को पटना हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है। कोर्ट ने दलील दी की कही-सुनी बातों पर किसी को सजा नहीं दी जा सकती है। निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए पटना हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। पटना हाई कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति बी़एऩ सिन्हा और न्यायमूर्ति ए़क़े लाल की खंडपीठ ने साक्ष्य के अभाव में सभी 26 अभियुक्तों को बरी कर दिया।

गौरतलब है कि 1 दिसंबर 1997 में लक्ष्मणपुर-बाथे में भूमि विवाद को लेकर गांव के 58 दलितों को मौत के घाट उतार दिया गया था। मरने वालों में 27 औरतें 16 बच्चे शामिल थे। रणवीर सेना के करीब 100 सशस्त्र सदस्य आरा से सोन नदी के जरिए लक्ष्मणपुर-बाथे गांव पहुंचे थे और इस नरसंहार को अंजाम दिया था।

जिसके बाद इस मामले पर सुनवाई करते हुए पटना की एक विशेष अदालत ने 7 अप्रैल 2010 को बिहार के अरवल जिले के लक्ष्मणपुर-बाथे नरसंहार मामले में 16 अभियुक्तों को फांसी और 10 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जबकि दो आरोपियों की इस दौरान मौत हो गई। पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पटलते हुए सभी 26 आरोपियों को बरी कर दिया है। ऐसे में एक सवाल जो नरसंहार पीड़ितों के मन में दौड़ना शुरु हो गया है कि अगर सभी 26 आरोपी निर्दोष है तो 58 लोगों का हत्यारा कौन है?

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