नक्सली मुठभेड़ में "पुलिस की गोली" से शहीद हुए थे 10 जवान!
पटना( मुकुंद सिंह) गया औरंगाबाद जिले की सीमा पर हुई नक्सली मुठभेड़ में शहीद हुए 10 जवानों को लेकर एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। पता चला है कि सभी शहीद जवानों की मौत पुलिस की गोली से हुई है। इस बात का खुलासा करते हुए एडीजे हेडक्वार्टर सुनील कुमार ने बताया कि नक्सलियों के पास से जो हथियार और कारतूस मिले हैं वह पुलिस के हैं।

इस तरह की बात सामने आते ही एक बार फिर बिहार के पुलिस विभाग पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। एडीजी हैडक्वाटर ने कहा है कि मिली हुई गोली तथा कारतूस की जांच कराई जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि आखिरकार उन लोगों के पास वह कैसे पहुंची। वहीं गृह मंत्रालय ने भी इस मामले को लेकर बिहार पुलिस से रिपोर्ट मांगी है। तो पुलिस इस घटना में सीपीआई माओवादियों का हाथ बता रही है। मुठभेड़ में मारे गए तीन नक्सलियों की अब तक शिनाख्त नहीं हो पायी है।
आपको बताते चलें कि सोमवार को सीआरपीएफ के जवान और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें दोनों तरफ से जमकर गोलीबारी हुई। इस गोलीबारी में 10 जवान शहीद हो गए और तीन नक्सली मारे गए हैं।
वहीं इस ऑपरेशन में कई तरह के सवाल सामने आ रहे हैं जिसमें प्रशासन की लापरवाही साफ तौर पर झलक रही है।
- आखिरकार कैसे जवानों पर भारी पड़ गए नक्सली?
- क्या पहले से कोई तैयारी थी या अचानक शुरु कर दिया गया ऑपरेशन?
- ऑपरेशन को लेकर क्या कोई खुफिया सूचना मिली थी?
- यदि सूचना पर चला ऑपरेशन तो क्यों नहीं थी तैयारी?
- स्थानीय पुलिस के जवान मौके पर क्यों नहीं पहुंचे?
- सीआरपीएफ के कोबरा जवान आखिरकार अकेले क्यों गये?
- जवानों के शव निकालने में आखिरकार बिहार पुलिस ने क्यों देरी की?
- पुलिस और सीआरपीएफ के बीच थी को-ऑर्डिनेशन की कमी क्यों हुई?












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