पेंटागन ने फिर दोहराई अपनी बात, आतंकियों के लिए सुरक्षित ठिकाना है पाक
वाशिंगटन। पेंटागन ने एक बार फिर अपनी एक बात को दोहराते हुए पाकिस्तान को आतंकियों की सुरक्षित पनाहगार करार दिया है। अमेरिका के रक्षा संस्थान पेंटागन ने साफ कहा है कि ऐसे आतंकी संगठन जो भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ आतंकी साजिश रच रहे हैं, उनके खिलाफ पाक के रुख में कोई कमी नहीं आई है।

पाक के साथ बातचीत का अहम मुद्दा
अमेरिका के रक्षा विभाग के प्रेस सेक्रेटरी रियर एडमिरल जॉन किर्बी ने कहा है कि पाक में कुछ खतरनाक आतंकी संगठनों ने शरण ले रखी है। अमेरिका के लिए यही बात पिछले कई वर्षों से चिंता की बड़ी वजह बनी हुई है।
किर्बी के मुताबिक जब कभी भी उनकी मुलाकात पाक के किसी वरिष्ठ अधिकार या अपने समकक्ष से होती है तो वह इसी मसले पर उनसे चर्चा करते हैं।
किर्बी के इस बयान से कुछ दिन पहले ही अमेरिकी कांग्रेस की ओर से कहा गया था कि पाक अपने यहां मौजूद आतंकी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा और हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ हो रही कार्रवाई में उसे विश्वास में नहीं ले पा रहा है।
आतंक की सरजमीं पाक
आपको बता दें कि अक्टूबर 2014 में पेंटागन ने कहा था कि भारत के खिलाफ आतंकी ताकतों को पाकिस्तान अपनी सरजमीं का प्रयोग करने दे रहा है। इससे पहले अमेरिका वर्ष 2013 में और फिर 2014 में आतंकी संगठनों के लिए पाक के रुख की समीक्षा भी कर चुका है। अमेरिका ने साफ कर दिया था कि पाक अमेरिकी कांग्रेस की ओर से तय स्टैंड्डर्स पर खरा नहीं उतर रहा है। ऐसे में कांग्रेस के समर्थन के बिना ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन पाक को आर्थिक मदद आसानी से नहीं कर सकता है।
आईएसआई आतंकियों की सरंक्षक
वहीं दूसरी ओर अमेरिका के विशेषज्ञ कहते हैं कि पाकिस्तान ने भले ही पेशावर में खतरनाक आतंकी हमला झेला हो लेकिन इसके बाद भी उसका रवैया नहीं बदला है। सीआईए के पूर्व अधिकारी ब्रूस रीडिल के मुताबिक पाक की इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई लगातार लश्कर और शूरा की गार्जियन के तौर पर काम कर रही है।
अमेरिकी सुरक्षा विशेषज्ञ लिजा कुर्टिस के मुताबिक, भारत व अफगानिस्तान के खिलाफ हमलों को अंजाम देने वाले आतंकियों को गिरफ्तार कर उन्हें सजा दिलवाने की दिशा में पाकिस्तान के प्रयास नाकाफी रहे हैं।
खासकर मुंबई हमले के प्रमुख साजिशकर्ता जकीउर रहमान लखवी की जमानत के बाद पाकिस्तान के लिए स्थितियां और भी खराब हो गई हैं। बकौल कुर्टिस विदेश मंत्री जॉन केरी के इस्लामाबाद दौरे में इस मुद्दे को उठाया जा सकता है।












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