पाकिस्तानी सेना ने अपने ही लोगों पर की ड्रोन से बमबारी, 9 को उतारा मौत के घाट, 12 आतंकियों को भी मारने का दावा
Pakistani Army drone attack: पाकिस्तान की सेना, जो खुद को आतंकवाद के खिलाफ जंग में सबसे आगे दिखाने की कोशिश करती है, उसी ने अपने ही नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मरदान जिले में किए गए ड्रोन हमलों में 9 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई, जबकि पाकिस्तानी सेना दावा कर रही है कि उसने 12 आतंकियों को मार गिराया है। सवाल ये उठता है कि आतंकवाद मिटाने के नाम पर बेखौफ सेना अपने ही लोगों पर हमले क्यों कर रही है?
मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान सेना ने शनिवार सुबह आतंकवाद रोधी अभियान के तहत मरदान जिले के कटलांग इलाके में पहाड़ी क्षेत्रों को निशाना बनाया। लेकिन स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जिन लोगों की मौत हुई, वे आतंकी नहीं बल्कि चरवाहे थे, जो स्वात जिले से आए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स में रेस्क्यू 1122 के प्रवक्ता मुहम्मद अब्बास के हवाले से बताया गया है कि 7 पुरुषों और 2 महिलाओं के शव मरदान-स्वात मोटरवे से बरामद किए गए, जिन्हें मेडिकल कॉम्प्लेक्स में भेजा गया। शव इतनी बुरी तरह से क्षत-विक्षत थे कि उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है।
इसके बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए मोटरवे को जाम कर दिया। हालांकि, प्रशासन ने बातचीत के बाद प्रदर्शनकारियों को शांत कराया और शवों को डीएनए जांच के लिए भेज दिया गया।
आतंकियों को मारने का दावा या फर्जी ऑपरेशन?
पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान 12 कुख्यात आतंकियों को मार गिराया गया। इनमें मोहसिन बाकिर, जिसके सिर पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम था। वहीं अब्बास, जिसके सिर पर 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम था। दावा किया जा रहा है कि यह ऑपरेशन हथियारबंद आतंकियों के बारे में मिले खुफिया इनपुट के आधार पर किया गया था। ऐसे में क्षेत्र में चल रही आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े कई आतंकी मारे गए हैं।
पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि ये सभी आतंकी संगठन से जुड़े हुए थे और इलाके में सुरक्षा बलों पर हमले की साजिश रच रहे थे। लेकिन सवाल ये है कि अगर सेना को इतनी सटीक खुफिया जानकारी थी, तो निर्दोष नागरिकों की जान क्यों गई?
सेना की 'गलती' या पाकिस्तानी सरकार की विफलता?
इस ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान सरकार बचाव की मुद्रा में नजर आ रही है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन गंदापुर ने इसे "दुखद और निंदनीय" करार दिया और कहा कि "ऐसे अभियानों में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।" सरकार ने बयान में कहा कि पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा और घायलों को चिकित्सा सहायता मिलेगी। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान की सेना ने निर्दोष लोगों को आतंकवाद के नाम पर मार गिराया हो।
खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार बैरिस्टर मुहम्मद अली सैफ ने इसे "एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना" बताया और कहा कि "सरकार प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करती है।"












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