कैसे पाकिस्तान ने ली पीएम मोदी से सीख? हज जाने वाली मुस्लिम महिला को दी 'महरम' से मुक्ति
पाकिस्तान ने भी हज जाने वाली महिला तीर्थ यात्रियों को पुरुष अभिभावक या महरम के बिना हज यात्रा की अनुमति दे दी है। इससे उन महिलाओं को हज यात्रा की मुराद पूरी करने में आसानी होगी, जो इस शर्त की वजह से हज पर नहीं जा पाती थीं।
पिछले साल सऊदी अरब ने सभी उम्र की महिलाओं को वार्षिक मक्का तीर्थ यात्रा पर बिना महरम के जाने की इजाजत दी थी, इसमें शर्त यह थी कि वह समूह में जाएंगी। गौरतलब है कि भारत में भी 2018 से पहले किसी भी उम्र की महिला को भी बगैर महरम के हज यात्रा की छूट नहीं थी।

काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडियोलॉजी ने दी सलाह
पाकिस्तान में इस मुद्दे को लेकर विभिन्न इस्लामी स्कूलों के विचार में काफी मतभेद थे। इसके बाद पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने इसपर काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडियोलॉजी से राय देने को कहा था। यह काउंसिल पाकिस्तान की एक संवैधानिक संस्था है, जो धार्मिक मसलों पर सरकार और संसद को कानूनी सलाह देती है।
महरम पर मुस्लिम विचारधाराओं में हैं मतभेद
काउंसिल ने सलाह देने से पहले इस मसले पर विभिन्न मुस्लिम विचारधाराओं के नजरिए की छानबीन की। जैसे जाफरी, मलिकी और शफी विचारधारा में बिना महरम के महिलाओं के हज पर जाने की अनुमति है। लेकिन, हनाफी और हनबाली विचारधारा बिना पति, बेटे या पिता के साथ इस यात्रा पर महिलाओं के जाने की इताजत नहीं देती है।
इस शर्त के आधार पर दी गई मुस्लिम महिलाओं को छूट
इन सब विचारधाराओं पर सोच-विचार के बाद काउंसिल ने सरकार को सलाह दी कि मुस्लिम महिलाएं महरम के बिना हज पर जा सकती हैं, यदि उनके माता-पिता या पति इसकी इजाजत दें। इसके मुताबिक, 'एक महिला जो विश्वसनीय महिला के साथ हो और जो यात्रा के दौरान या तीर्थ के दौरान असुरक्षित नहीं महसूस करती हो, वह बिना महरम के हज कर सकती है। '
भारत में 2018 से ही मुस्लिम महिलाओं को है इजाजत
गौरतलब है कि भारत में मुस्लिम महिलाओं को अकेले या बिना महरम (पुरुष अभिभावक) के हज यात्रा की यह छूट 2018 से ही मिल रही है। इस साल तो बिना महरम के हज यात्रा पर जाने वाली मुस्लिम महिलाओं की संख्या 4 हजार को पार कर चुकी है, जो कि यह व्यवस्था शुरू होने के बाद सबसे ज्यादा है।
हर साल 25 से 30 लाख हज यात्री मक्का पहुंचते हैं, जिनमें से भारतीय तीर्थयात्री की संख्या तीसरे स्थान पर होती है। इस साल भारतीय हज यात्रियों के लिए 1 लाख 75 हजार से अधिक का कोटा निर्धारित है। पिछले 30 मई को जब 200 मुस्लिम महिलाएं हज यात्रा के लिए बिना महरम के दिल्ली एयरपोर्ट पर थीं तो उन्हें विदा करने के लिए विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी भी वहां पहुंचीं थीं।
मुस्लिम महिलाओं ने पीएम मोदी के प्रति जताया आभार
इस दौरान बिना पुलिस अभिभावक के हज यात्रा पर जाने वाली महिलाओं ने महरम से राहत दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। एक महिला हज यात्री ने कहा, "प्रधानमंत्री जी ने जो ये किया है, बहुत अच्छा किया है। हम उनके बहुत आभारी हैं। उन्होंने बहुत अच्छा किया।"
पीएम मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में दी थी जानकारी
पीएम मोदी ने महरम को खत्म करने की बात सबसे पहले 31 दिसंबर, 2017 के अपने रेडियो पर प्रसारित 'मन की बात' कार्यक्रम में बतायी थी। उन्होंने कहा था, 'हमारी जानकारी में एक बात आई है कि अगर कोई मुस्लिम महिला, हज यात्रा के लिए जाना चाहती है तो वो 'महरम' या अपने पुरुष अभिभावक के बिना नहीं जा सकती है। मैंने जब इसके बारे में पहली बार सुना तो मुझे लगा कि ऐसा कैसे हो सकता है? इस तरह के नियम किसने बनाए होंगें?'
पीएम मोदी ने कहा था कई इस्लामिक देशों में भी ऐसा नियम नहीं है। दशकों से मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय हो रहा था और कोई चर्चा भी नहीं होती थी। उन्होंने तभी कहा था कि उनकी सरकार ने यह पाबंदी हटाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री ने कहा, 'आज मुस्लिम महिलाएं, महरम के बिना हज के लिए जा सकती हैं।'












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