वाघा बॉर्डर तक आतंकियों का मार्च और पाकिस्तान का ढोंग!
लाहौर। पाकिस्तान की आदत है इंटरनेशनल कम्यूनिटी के बीच खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताना और फिर हमदर्दी हासिल करना। लेकिन फिर कुछ ऐसा हो ही जाता है कि उसका यह मुखौटा उतर जाता है।

मोस्ट वांटेड आतंकी और लश्कर-ए-तैयबा के चीफ हाफिज सईद और हिजबुल मुजाहिद्दीन का चीफ सैयद सलाहुद्दीन भी वाघा बॉर्डर तक निकाले गए मार्च में शामिल थे। मार्च को पाकिस्तान के सीनेटर और जमात-ए-इस्लामी के मुखिया सिराजुल हक ने लीड किया।
कश्मीर को लेकर निकाला गया मार्च
सर्दइ और सलाहुद्दीन दोनों के मार्च निकालने का मकसद वही पुराना कश्मीर है। सलाहुद्दीन का कहना है कि भारत ने कश्मीर को बंधक बनाकर रखा है और वहां पर इंडियन आर्मी लोगों पर जुल्म ढहा रही है।
वहीं सिराजुल हक भी इन दोनों के सुर में सुर मिला रहे हैं। हक की ओर से इस मार्च के बारे में ऐलान किया गया था और उन्होंने अपने ऐलान में कहा था कि मार्च का मकसद कश्मीर में आजादी की आवाज को दुनिया तक पहुंचाना है।
लाहौर से निकाला गया था मार्च
जमात-ए-इस्लामी के हजारों कार्यकर्ताओं समेत कई लोग रविवार को वाघा बॉर्डर तक पहुंचे। हिजबुल के कमांडर बुरहान वानी की पिछली आठ जुलाई को हुई मौत के बाद कश्मीर के हालातों को कैश कराने के लिए पाकिस्तान पिछले कई दिनों से कई हथकंडे अपना रहा है। यह मार्च भी पाकिस्तान के उन्हीं कुछ हथकंडों में शामिल था। यह मार्च लाहौर के नसीर बाग से शुरू हुआ था।
दुनिया का ध्यान खींचना चाहता है पाक
पिछले माह जब से कश्मीर में सुरक्षाबलों ने हिजबुल कमांडर बुरहान वानी को मार गिराया है तब से ही पाक की ओर से इस तरह के बयान आ रहे हैं, जिनमें भारत को ही दोषी ठहराए जाने की कोशिशें हो रही हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ खुद भी वानी की मौत को सदमा करार दे चुके हैं। जो कुछ भी पिछले कुछ दिनों से हो रहा है उसका मकसद कश्मीर मुद्दे की ओर दुनिया का ध्यान फिर से आकर्षित करना है।
आपको बता दें कि अमेरिका इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करने के साथ ही यह भी कह चुका है कि कश्मीर मुद्दा भारत और पाक का आतंरिक मामला है और वह इसमें हस्तक्षेप को इच्छुक नहीं है।












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