पाकिस्तान का छोटू गैंग जिसकी कहानी पूरी फिल्मी है
इस्लामाबाद। बड़ी मशक्कत के बाद पाकिस्तान की सेना ने पंजाब प्रांत में राजनपुर स्थित एक नदी के टापू पर छोटू गैंग के चंगुल से 24 पुलिसवालों को रिहा करा लिया।

17 दिन से पुलिस वाले थे किडनैप
यह लोग पिछले करीब 17 दिन गैंग के पास बंदी थे। सेना के हेलीकॉप्टर्स और जमीन पर मौजूद सैनिकों के अलावा पुलिस की मदद भी ली गई थी। लेकिन छोटू गैंग के आगे सब कमजोर साबित हो रहे थे।
गैंग ने जिन पुलिसवालों को बंदी बनाया था उसमें से सात की मौत हो चुकी है। इस गैंग की ताकत और इसके आत्मविश्वास का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि इसने सेना की चेतावनी को भी नजरअंदाज कर दिया था। आइए आज आपको पाक के इस गैंग से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में बताते हैं।
कौन है छोटू गैंग का छोटू
- एक किसान का बेटा गुलाम रसूल यानी छोटू ही इस गैंग का मुखिया है।
- वह वर्ष 1988 में पाक के काश्मोर इलाके में एक ढाबे पर काम करता था।
- 13 वर्ष की उम्र में वह जिस ढाबे पर काम कर रहा था वह ट्रक ड्राइवरों के लिए ही था।
- पाक न्यूजपेपर जंग में उसके इंटरव्यू के मुताबिक एक झगड़े की वजह से उसका भाई जेल जा चुका था।
- इसके बाद परिवार के बाकी लोग गिरफ्तारी से बचने के लिए भाग गए।
- उनका कहना है कि वर्ष 1989 में पुलिस ने उन्हें चोरी के एक गलत केस में फंसा दिया था।
- गुलाम रसूल के मुताबिक वह रिश्वत नहीं दे पाए थे जिसकी वजह से उन्हें जेल में डाल दिया गया।
- जेल जाने के बाद उनके पड़ोसियों ने उनकी 12 एकड़ पुश्तैनी जमीन को हथिया लिया। 0
- छोटू दो वर्ष बाद जेल से वापस आया और फिर वह अपराधी बाबा लवांग के गिरोह में शामिल हो गया।
- बाबा लवांग ने ही उसे छोटू नाम दिया और फिर उसके भाई भी इस गिरोह का हिस्सा बन गए।
कैसे करता है अपना काम
- छोटू गैंग एक डाकुओं का गिरोह है जो सिंध की राजनपुर नदी पर स्थित एक टापू से काम करता है।
- पिछले 10 वर्षों से ज्यादा समय से भी यह गिरोह यहां पर सक्रिय है।
- लोगों का मानना है कि इस गिरोह में करीब 300 से ज्यादा लोग शामिल हैं।
- आज छोटू गैंग पाक का एक एक सक्रिय और कुख्यात गैंग बन चुका है।
- गैंग तस्करी, फिरौती के लिए अपहरण और हाइवे पर लूटपाट जैसे कामों को अंजाम देता है।
- छोटू गैंग का राजनपुर में नदी में बने कई टापुओं पर नियंत्रण है, जहां घने जंगल हैं।












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