Citizenship Amendment Act: पाकिस्तान के पीएम इमरान खान बोले-भारत से आने वाले मुसलमानों के लिए यहां जगह नहीं
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत के नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर सवाल उठाए हैं। अपने देश की परेशानियों पर आंखें बंद कर बैठे इमरान ने भारत सरकार के इस फैसले को दुनिया में आने वाले संकट की वजह बताया है। इमरान ने इसके साथ ही एक बार फिर जम्मू कश्मीर का राग भी अलाप दिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नागरिकों से अपील की है कि वे नए कानून पर शांति बरकरार रखें। उन्होंने नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि नए कानून से किसी को भी कोई नुकसान नहीं होगा।

जेनेवा में पाक पीएम ने कही बात
पाकिस्तान के पीएम इमरान ने कहा है कि नए नागरिकता कानून के बाद कई मुसलमान भारत को छोड़ सकते हैं। इसकी वजह से दुनिया में एक बड़ा संकट पैदा हो जाएगा। इमरान ने यह बात जेनेवा में शरणार्थियों पर जारी एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यह बात कही है। इमरान के शब्दों में, 'हमें इस बात की चिंता है कि इससे न सिर्फ दुनिया में एक नया शरणार्थी संकट पैदा होगा बल्कि इस कानून की वजह से परमाणु शक्ति से लैस दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ेगा।'

मामले में हस्तक्षेप की अपील
मंगलवार को इस मंच से इमरान ने दुनिया से इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा। इसके साथ ही उन्होंने यहां पर साफ कर दिया कि पाकिस्तान, कश्मीर में लगाए गए कर्फ्यू की वजह से भारत की तरफ से आने वाले मुसलमान शरणार्थियों को अपने यहां जगह नहीं देगा। इस कानून के तहत भारत के तीन मुसलमान आबादी वाले देशों, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले गैर-मुसलमान शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिल सकेगी। हिंदूओं, सिखों, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के ऐसे लोग जिन्हें धर्म की वजह से मुश्किलें झेलने को मजबूर होना पड़ता है उन्हें नागरिकता मिलेगी।

पीएम मोदी ने कहा 1000 प्रतिशत सही फैसला
नए कानून के बाद भारत में छह साल तक भारत में रहने वाले शरणार्थी कानूनी तौर पर भारत की नागरिकता हासिल कर सकेंगे। पीएम मोदी ने पिछले दिनों कहा था, ' मैं इस बात को दावे के साथ कह सकता हूं कि संसद की तरफ से नागरिकता संशोधन बिल (कैब) को पास करने का जो फैसला लिया गया वह 1,000 प्रतिशत सही है।' साल 2016 में इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) की तरफ से गई जानकारी के मुताबिक इस समय देश में कुल 31,313 अप्रवासी नागरिक हैं। इनमें से 25,447 हिंदू, 5,807 सिख, 55 क्रिश्चियन, दो बौद्ध और दो पारसी हैं।

कैसे मिल सकेगी नागरिकता
आईबी ने उस समय समिति को बताया था, 'किसी को भी इस श्रेणी के तहत भारतीय नागरिकता के लिए अप्लाई करने के लिए यह साबित करना होगा कि धर्म की वजह से उन पर हुए जुल्मों की वजह से वे भारत आने को मजबूर हुए हैं।' आईबी ने कहा था कि हर दावे को सख्ती से परखा जाएगा और तब ही नागरिकता दी जाएगी।












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