एनसीआर के तीन इंजीनियर समाए अलकनंदा में?
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) रविवार को बदरीनाथ यात्रा से लौटते वक्त देवप्रयाग के समीप बोलेरो समेत अलकनंदा में समाए महेंद्रा कंपनी के तीनों इंजीनियरों का कुछ पता नहीं चल पाया।
ये तीनों एनसीआर से संबंध रखते हैं। एनसडीआरएफ, जल पुलिस और आपदा प्रबंधन टीम उनकी तलाश में जुटी है। इंजीनियरों के परिजन भी देवप्रयाग पहुंच गए हैं।
सर्च अभियान चालू
मालूम चला है कि सर्च अभियान फिर शुरू किया गया है। देवप्रयाग के थाना प्रभारी हेमंत खंडूड़ी ने इन इंजीनियरों के परिजनों को बताया कि सर्च अभियान के तहत दुर्घटना स्थल के अलावा अलकनंदा नदी में सभी संभावित स्थलों पर वाहन की तलाश की गई। हालांकि कोई सफलता नहीं मिल पाई। इस बीच तीनों इंजीनियरों के परिजन भी देवप्रयाग पहुंचे।
इकलौता बेटा
साहिबाबाद (गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश) से आए लोकेश शर्मा ने बताया कि आशुतोष उनका इकलौता बेटा है। उन्होंने बताया कि आठ अगस्त को उनकी बेटे से बात हुई थी। फरीदाबाद से आए इंजीनियर राकेश सिसौदिया के बड़े भाई मनीष सिसौदिया बताते हैं कि उसकी एक वर्ष पहले ही शादी हुई थी। राकेश की पत्नी अंशु रविवार को उसका लौटने का इंतजार कर रही थी। पिता आरपी सिंह बताते हैं कि आठ अगस्त सांय को उनकी राकेश से बात हुई थी।
क्रासिंग रिपब्लिक (गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश) निवासी इंजीनियर शिवकांत सिंह के भाई शशिभूषण का कहना है कि 31 जुलाई को शिवकांत को कंपनी में प्रोन्नति मिली थी। तीन भाइयों में वह सबसे बड़े थे। वह बताते हैं कि घर पर शिवकांत की पत्नी मणिमाला और 12 वर्षीय बेटा आदित्य इंतजार कर रहे हैं।













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