सावधान: दिल्‍ली के कलावती अस्‍पताल हर रोज होती है 3 बच्‍चों की मौत

Over 1,300 infants die in Kalawati Hospital in 1 year
नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। अगर आपका बच्‍चा डायरिया, क्षय, टेटनस, वायरल एंसैफैलाइटिस, एनीमिया, कुपोषण, निमोनिया, सांस संबंधी रोगों और नीओनैटल सेप्टीसीमिया जैसी बीमारियों से ग्रसित है और आप उसे दिल्‍ली के कलावती सरन शिशु अस्‍पताल ले जाते हैं तो जरा सावधान हो जाइए। पिछले साल इस अस्‍पताल में 1300 से अधिक बच्‍चों की मौत हो चुकी है। सीधे तौर पर कहें तो इस अस्‍पताल में हर रोज औसतन 3 से अधिक बच्‍चों की जान जा रही है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत हासिल की गई जानकारी के अनुसार अस्पताल में जनवरी 2013 से जनवरी 2014 के बीच 1,345 बच्चों की मौत हुई।

इतना ही नहीं इस साल सिर्फ जनवरी माह में ही 75 बच्‍चों की मौत अस्‍पताल में हुई है। वर्ष 2013 के मार्च महीने में 78, अप्रैल में 87, मई में 115, जून में 77 और जुलाई में 85 नवजातों ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था। आवेदन के जवाब में बताया गया कि अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में कुल 5 वेंटीलेटर हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ दो ही काम कर रहे हैं। दो वेंटीलेटर निष्क्रिय हैं और एक को मरम्मत के लिए भेजा गया है।

नीओनैटोलॉजी विभाग में वेंटीलेटरों की भारी कमी है। इस विभाग में कुल 6 वेंटीलेटर हैं जिनमें से दो काम नहीं कर रहे हैं। आवेदन के जवाब में कहा गया है कि इस विभाग के लिए 10 अतिरिक्त वेंटीलेटरों की जरूरत है। अस्पताल के अनुसार सर्वाधिक मौतें डायरिया, क्षय, टेटनस, वायरल एंसैफैलाइटिस, एनीमिया, कुपोषण, निमोनिया, सांस संबंधी रोगों और नीओनैटल सेप्टीसीमिया जैसी बीमारियों के चलते हुईं। बताया गया है कि अस्पताल में भर्ती कराए जाने वालों बच्चों में से अधिकतर एक्यूट ब्रांकाइटिस और ब्रांकाइटिस जैसे श्वसन रोगों से पीड़ित थे।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+