दिल्ली वालों को मिलेगी राहत, फिर से शुरू हो सकता है बंद पड़ा 150 बेड का अस्पताल, AAP ने बतायी ये शर्त
नई दिल्ली। कोरोना की दूसरी लहर ने पूरे देश भर में हाहाकार मचा दिया है। स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की कमी के चलते मरीजों की मौत हो रही है। इसी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बंद पड़े 150 बेड वाले अस्पतालों को खोलने के लिए प्रस्ताव दिल्ली हाईकोर्ट के सामने रखा है। दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि बंद पड़े 150 बेड वाले फेब्रिस मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल को शुरू करने के लिए लाइसेंस दिया जा सकता है जिसे उसकी मूल कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया के कारण बंद कर दिया गया था। सरकार ने कोर्ट के सामने यह भी शर्त रखा है कि उन अस्पतालों का बुनियादी ढ़ाचा ठीक हो।

आम आदमी पार्टी ने कहा है कि वह इसपर आने वाले खर्च और कोरोना केंद्र चलाने के लिए आवश्यक चीजों का भार नहीं उठा सकती क्योंकि उसके खुद के अस्पतालों में कर्मचारियों, दवाइयों और उपकरणों की कमी है। आम आदमी पार्टी के वकील संतोष के त्रिपाठी ने इस संबंध में हलफनामा दाखिल किया है और कहा है कि अगर कोर्ट की तरफ से निर्देश दिया जाता है और बंद पड़े अस्पताल दिल्ली नर्सिंग होम पंजीकरण अधिनियम में दिए गए मापदड़ों को पूरा करता है तो उसे लाइसेंस दिया जा सकता है।
आपको बता दें कि कोर्ट ने महामारी की दूसरी लहर के मद्देनजर बीते 6 मई को दिल्ली सरकार से लीक से हटकर सोचने के लिए कहा था। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा था कि राजधानी में मरीजों के लिए अस्पतालों में बेड्स की कमी है और हम सामान्य परिस्थिति में नहीं हैं इसलिए कुछ अलग सोचना होगा। चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने दिल्ली सरकार से कहा था कि 150 बेड उपलब्ध हैं। हम हर दिन बेड ढूंढने के लिए लड़ रहे हैं और आप कह रहे हैं कि इस अस्पताल का उपयोग नहीं करेंगे।












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