सम-विषम फार्मूला दिल्ली से का बिजनेस होगा चौपट
नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल द्वारा दिल्ली में सम-विषम फॉर्मूले को लागू करने के ब्लू प्रिंट के आते हर कोई सोच में पड़ा है कि अब होगा क्या। उन्हीं लोगों के बीच में व्यापारी वर्ग भी है, जो इस बात को लेकर परेशान है कि इस फॉर्मूले की वजह से उनका धंधा चौपट हो सकता है। जी हां व्यापारी वर्ग की मानें तो सम-विषम फॉर्मूले का दिल्ली के व्यापार पर घातक असर हो सकता है।

व्यापारियों के संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल का कहना है थ्क इस फॉर्मूले के बजाय दिल्ली में विभिन्न वर्गों के लिए अलग अलग कर समय निर्धारित किये जाएं तो काफी हद तक प्रदूषण पर काबू पाया जा सकता है और किसी को परेशानी भी नहीं होगी।
पढ़ें- एक बार समझिये तो क्या है सम विषम फार्मूला
खंडेलवाल का कहना है कि दिल्ली के व्यापारी बड़ी संख्यां में दिल्ली सटे इलाके नोयडा,फरीदाबाद,गुडगाँव तथा अन्य जगहों पर रहते हैं। यह एक सर्विदित तथ्य है की व्यापारी के पास हमेशा नकद राशि रहती है और जिस दिन उनके पास कार नहीं होगी वो नकद राशि कैसे लेकर जाएंगे? क्या यह उनकी जान माल की सुरक्षा को खतरा नहीं होगा? शायद सरकार ने फार्मूला बनाते समय इस पर ध्यान नहीं दिया। और दूसरी बात क्लाइंट जो दिन बतायेंगे, उस दिन हमें डील करने के लिये जाना होगा। क्लाइंट डील करने से पहले यह नहीं पूछेंगे कि व्यापारी के पास सम नंबर की गाड़ी है या विषम नंबर की। ऐसे में नुकसान केवल व्यापारियों को झेलना पड़ेगा।
दिल्ली की अर्थव्यवस्था को पहुंचेगी चोट
खंडेलवाल का कहना है कि केजरीवाल द्वारा जारी विवरण में ट्रक-टेम्पो को कोई छूट नहीं है, जबकि दिल्ली में लगभग 80 प्रतिशत सामान सड़क परिवहन के द्वारा आता है और सम-विषम का यह फार्मूला उन पर लागू होने से दिल्ली की सप्लाई लाइन पर बहुत बड़ा फर्क पड़ेगा और दिल्ली में वस्तुओं की किल्लत भी होगी और उनके दाम बढ़ने की सम्भावना से इंकार भी नहीं किया जा सकता। ऐसे में दिल्ली की अर्थव्यवस्था को भी चोट पहुंचेगी।
क्या है खंडेलवाल का सुझाव
प्राय : सभी ऑफिस एवं मार्किट 10 बजे एक साथ खुलते हैं, जिसके कारण सड़कों पर वाहनों की भीड़ बढ़ जाती है और ट्रैफिक जाम का रूप ले लेती है, जिस से पर्यावरण प्रदूषित होता है। यदि कार्य समय में परिवर्तन करते हुए विभिन्न वर्गों के लिए अलग अलग समय निर्धारित कर दिया जाए, तो एक ही समय पर सड़कों पर चलने वाले वाहनों में कमी आएगी और ट्रैफिक जाम भी नहीं होगा वहीं दूसरी ओर सरकारी ट्रांसपोर्ट जैसे बसें, ऑटो, मेट्रो आदि पर भी भीड़ न होने की सम्भावना होगी।
कुछ वर्ग के कार्यालय सुबह 8 बजे खुलें वहीं कुछ 9 बजे ओर बाकी सब 10 बजे खुलें। इसी आधार पर कार्य समाप्ति का समय निर्धारित हो। ऐसा होने से पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर ज्यादा बोझ नहीं होगा और लोगों को शारीरिक एवं मानसिक तनाव से भी बचाया जा सकेगा। सिंगापुर में वर्ष 1975 से यह सिस्टम सफलतापूर्वक चल रहा है।












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