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निर्भया कांड के 10 साल: उस दिन क्या और कैसे हुआ था ? 7 साल बाद गुनहगारों को मिली फांसी

16 दिसंबर, 2022 को दिल्ली के निर्भया गैंगरेप केस की 10वीं बरसी है। निर्भया के साथ 6 दरिंदों ने अत्याचार किया था, जिनमें से एक ने खुदकुशी कर ली थी। एक नाबालिक दोषी जल्द ही छूट गया। चार दोषियों को 2020 में फांसी दी गई थी।

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10 Years after Nirbhaya horror: दिल्ली के कुख्यात निर्भया गैंगरेप की आज 10वीं बरसी है। आज ही के दिन दक्षिणी दिल्ली में 23 साल की फिजियोथेरेपिस्ट के साथ 6 दरिंदों ने गैंगरेप की ऐसी घटना को अंजाम दिया था, जिसके नाम से आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। निर्भया कांड के बाद देश में कानून भी बदला गया। देश में अब कोई भी रेप की जघन्य वारदात की बात होती है तो उसकी तुलना निर्भया के साथ हुई दरिंदगी से जरूर की जाती है। ऐसे में आज जब उस वारदात की 10वीं बरसी है तो उस दिन के बाद के घटनाक्रम पर एक नजर डाल लेना बनता है।

निर्भया के साथ उस रात क्या हुआ था ?

निर्भया के साथ उस रात क्या हुआ था ?

16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्ली में 23 साल की मेडिकल छात्रा के साथ 6 लोगों ने चलती बस में गैंगरेप की जघन्य घटना को अंजाम दिया था। घटना के वक्त बस में उन दरिदों के अलावा सिर्फ निर्भया और उसका एक दोस्त मौजूद था। दरिंदों ने पहले उसके दोस्त को रॉड से मारकर बेहोश कर दिया और फिर बस के पिछले हिस्से में जाकर उसके साथ दरिंदगी शुरू कर दी। उन बहशियों ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। गैंगरेप के बाद दोषियों ने उसके प्राइवेट पार्ट में सरिया डाल दिया। आखिरकार बस में सवार सभी गुनहगारों ने निर्भया और उसके दोस्त को चलती बस से नीचे फेंक दिया। उसके दोस्त के मुताबिक उन्हें बस से कुचलने की भी कोशिश की गई। जब किसी की नजर बिना कपड़ों के लहूलुहान लड़की और उसके दोस्त पर पड़ी तो पुलिस को सूचना दी गई, जिसने फौरन उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया।

निर्भया दरिंदों की गिरफ्त में कैसे आई थी ?

निर्भया दरिंदों की गिरफ्त में कैसे आई थी ?

दरअसल, उस रात निर्भया दक्षिणी दिल्ली के एक थियेटर में अपने दोस्त के साथ एक मूवी देखकर अपने घर द्वारका की ओर लौट रही थी। मुनिरका बस स्टैंड पर ऑटो छोड़कर वे दोनों बस का इंतजार कर रहे थे। तभी वह बस वहां पहुंची। बस में कुल 6 लोग पहले से ही मौजूद थे। जब बस थोड़ी देर रुककर पैसेंजरों को आवाज लगाकर आगे बढ़ने लगी तो निर्भया और उसके दोस्त को तसल्ली हो गया कि बस में सवार बाकी चार लोग यात्री ही हैं। इसी गलतफहमी में वे बस में सवार हो गए। फिर बस कर्मचारियों ने पहले उसके दोस्त को पीटकर बेहोश कर दिया और फिर निर्भया को नोंचना-खसोटना शुरू कर दिया।

निर्भया ने सिंगापुर के अस्पताल में दम तोड़ा

निर्भया ने सिंगापुर के अस्पताल में दम तोड़ा

इस घटना ने निर्भया को बुरी तरह जख्मी कर दिया था। उसकी आंत के 5 फीसदी हिस्से ही बच गए थे। पहले उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिर उसकी जान बचाने के लिए उसे सिंगापुर की अस्पताल में भर्ती कराया गया। निर्भया के साथ हुई बर्बरता को देखकर पूरे देश में अप्रत्याशित आक्रोश नजर आ रहा था। लोग उसकी जिंदगी के लिए दुआएं मांग रहे थे। लेकिन, 29 दिसंबर, 2012 को ही उसने इलाज के दौरान सिंगापुर के अस्पताल में दम तोड़ दिया।

निर्भया कांड के खिलाफ पूरा देश उबल पड़ा

निर्भया कांड के खिलाफ पूरा देश उबल पड़ा

निर्भया के साथ हुई बर्बरता ने पूरे देश को आक्रोशित कर दिया था। दिल्ली तो मानो सड़कों पर ही उतर गई थी। सड़क से संसद तक एक ही आवाज उठ रही थी, दोषियों को तत्काल सख्त से सख्त सजा मिले और ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए सख्त कानून बनाए जाएं। विरोध का स्तर ऐसा था कि उस समय की यूपीए सरकार हिल गई थी। लोगों की नाराजगी कम करने के लिए ही सरकार ने निर्भया को स्पेशल फ्लाइट से सिंगापुर भेजने का फैसला लिया था। देश में ही नहीं निर्भया कांड की खबर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बन गई थी।

6 में एक दरिंदे ने कर ली खुदकुशी

6 में एक दरिंदे ने कर ली खुदकुशी

सभी 6 दरिंदों को जल्द ही पकड़ लिया गया और उन सबपर सामूहिक बलात्कार का मामला चला। एक आरोप नाबालिग था। 11 मार्च, 2013 को राम सिंह नाम के एक आरोपी ने जेल में ही कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। बाकियों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट में ट्रायल चला। जुवेनाइनल जस्टिस ऐक्ट के तहत नाबालिग पर मुकदमा चला और उसे रेप और हत्या के लिए सिर्फ तीन साल की सजा सुनाई गई, जिसे पूरा करके वह आजाद हो गया और आज भी भारत के किसी कोने में मौजूद है। सजा भी उसने बाल सुधारगृह में ही काटी थी। कथित तौर पर निर्भया के साथ दरिंदगी करने वालों में यह सबसे ज्यादा खूंखार था। बाकी चारों आरोपी पवन गुप्ता, विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर और मुकेश सिंह को 10 सितंबर, 2013 को रेप और हत्या का दोषी पाया गया और फांसी की सजा सुनाई गई।

20 मार्च, 2020 को चारों दोषियों मिली फांसी

20 मार्च, 2020 को चारों दोषियों मिली फांसी

चारों दोषियों ने फांसी की सजा से बचने के लिए हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लंबी लड़ाई लड़ी। बचाव पक्ष ने उन्हें फांसी से बचाने के लिए सारे तिकड़म अपनाए। अपील पर अपील दायर की जाती रही। लेकिन, आखिरकार 18 दिसंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी अपील नामंजूर कर दिए। तब जाकर 20 मार्च, 2020 को चारों दोषियों को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी के फंदे पर लटका दिया गया।

निर्भया के बाद कानून बदले

निर्भया के बाद कानून बदले

निर्भया के साथ हुई घटना के बाद 21 मार्च, 2013 को देश में इससे संबंधित कानून में भी संशोधन किए गए। ज्यादा सख्त एंटी-रेप कानून लाया गया। क्रिमिनिल लॉ (अमेंडमेंट) ऐक्ट, 2013 में बलात्कार को नए सिरे से परिभाषित किया गया, सजा बढ़ाई गई, दो बार रेप करने पर मौत की सजा भी शामिल की गई। दोषियों को कठोर आजीवन कारावास की भी सजा की व्यवस्था की गई। साथ ही साथ एसिड अटैक के दोषियों के लिए भी कड़ी सजा का प्रावधान किया गया। इसके अलावा महिलाओं का पीछा करना या उनका ताक-झांक करना भी अपराध की श्रेणी में ले आया गया। हालांकि, कानून में संशोधन के बाद भी रेप की घटनाएं कम हुई हैं, ऐसा बिल्कुल ही नजर नहीं आता।


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