Niharika Vishwakarma : 50 दिन तैयारी कर अफसर बनीं हारमोनियम बेचने वाले की बेटी निहारिका विश्वकर्मा

नई दिल्ली, 2 जून। यह कहानी है छोटे से कस्बे की उस लड़की की, जिसने मुश्किल हालात से जूझकर सफलता के शिखर को छू लिया। उन तमाम लोगों को अपनी कामयाबी से जवाब दिया जो तीन बार फेल होने पर कहते थे कि 'तुमसे नहीं हो पाएगा।' लड़की का नाम है निहारिका विश्वकर्मा, जो आज उत्तर प्रदेश में जिला स्तर की अधिकारी हैं।

डीपीओ निहा​रिका विश्वकर्मा का इंटरव्यू

डीपीओ निहा​रिका विश्वकर्मा का इंटरव्यू

वन इंडिया हिंदी से बातचीत में निहारिका विश्वकर्मा ने अपने संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी बयां की। निहारिका विश्वकर्मा मूलरूप से उत्तर प्रदेश के सीतापु जिले के महमूदाबाद की रहने वाली हैं। अप्रेल 2021 में निहारिका विश्ववकर्मा ने यूपीपीएससी परीक्षा पास की है। इनका डीपीओ पद पर चयन हुआ है। ज्वाइनिंग मिलनी बाकी हैं।

 पुलिस केस से मिली अफसर बनने की प्रेरणा

पुलिस केस से मिली अफसर बनने की प्रेरणा

निहारिका विश्वकर्मा बताती हैं कि एक बार उनके घर में कोई पुलिस केस हो गया था। तब किसी ने हमारी मदद नहीं की थी। पिता कहा करते थे कि अगर हमारे परिवार में कोई पीसीएस अधिकारी होता तो आज किसी की हिम्मत नहीं होती कि हमें इस तरह से बेवजह परेशान कर सकता था। निहारिका कहती हैं कि मैं खुशनसीब हूं कि पिता का यह सपना पूरा करने का मौका ​मुझे मिला। यह मैंने बिना कोचिंग करके दिखाया है।

लखनऊ में रहकर की तैयारी

लखनऊ में रहकर की तैयारी

निहारिका कहती हैं कि पिता का पीसीएस अफसर बनने का ख्वाब पूरा करने में जुट गई थी। लखनऊ जाकर पीसीएस परीक्षा की तैयारी कर रही थी, मगर हिम्मत तब जवाब देने लगी जब लगातार तीन बार फेल हो गई। इसके बावजूद तैयारी नहीं छोड़ी। इस बीच कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन लग गया तो घर आ गई। कुछ समय बाद वापस लखनऊ लौटी।

 50 दिन की जमकर मेहनत

50 दिन की जमकर मेहनत

लॉकडाउन हटने के बाद निहारिका वापस लखनऊ आई और तैयारियों में जुट गई। अब निहारिका के पास सिर्फ 50 दिन का वक्त था। हालांकि लंबे से तैयारियां कर रही निहारिका की अब हर विषय पर अच्छी पकड़ थी और बाकी के ये 50 दिन निहारिका ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दिया। एक कमरे में बंद रही और किताबों से दोस्ती की। होली पर घर तक नहीं आई। अप्रैल 2021 में रिजल्ट आया तो पिता का ख्वाब पूरा हो चुका था।

असफलता को बनाया ताकत

असफलता को बनाया ताकत

लोग अक्सर असफल होने के बाद टूट जाते हैं। मेहनत करना छोड़ देते हैं। अपने लक्ष्य को हासिल करने की बजाय बीच रास्ते ही मंजिल बदल लेते हैं। ऐसा निहारिका के साथ भी हुआ। लगातार तीन बार अफसल होने के बाद निहारिका ने हिम्मत नहीं हारी और चौथी बार में अफसर बन गईंं।

 निहारिका विश्वकर्मा की जीवनी

निहारिका विश्वकर्मा की जीवनी

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के महमूदाबाद जैसे छोटे से कस्बे में पली-बढ़ी निहारिका युवक-युवतियों के लिए रोल मॉडल है, जो घर की आर्थिक स्थिति और हिंदी माध्यम की पढ़ाई को दोष देते हुए आगे नहीं पाते हैं। महमूदाबाद में ही निहारिका ने पढ़ाई पूरी की। ज्योग्राफी विषय में मास्टर डिग्री हासिल की।

 निहारिका विश्वकर्मा का परिवार

निहारिका विश्वकर्मा का परिवार

निहारिका विश्वकर्मा के पिता सुरेश विश्वकर्मा हारमोनियम बनाने का काम करते हैं जबकि मां आशा देवी हाउसवाइफ हैं। चार भाई बहनों में निहारिका तीसरे नंबर की है। बड़ा भाई दीपक कुमार विश्वकर्मा इलाहाबाद बैंक में मैनेजर और बड़ी बहन दीपिका विश्वकर्मा इंडियन ओवरसीज बैंक में कार्यरत हैं। छोटा भाई संदीप एसएससी की तैयारियां कर रहा है।

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