अंडे बेचने व पंक्चर बनाने वाले ने पास की UPSC, जानिए कौन हैं IAS वरुण बरनवाल व मनोज कुमार रॉय

नई दिल्ली, 26 मई। सपने अगर बड़े हों तो उन्हें पूरा करने के लिए किया गया कोई भी काम छोटा नहीं होता। इस बात का उदाहरण हैं ये दो शख्स जो कभी अंडे बेचने व साइकिल की पंक्चर बनाने का काम करते थे और आज अफसर हैं। हम बात कर रहे हैं सोशल मीडिया पर छाए रहने वाले आईएएस अधिकारी वरुण बरनवाल और मनोज कुमार रॉय की। दोनों ने बेइंतहा गरीबी देखी। पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए दुकान व रेहड़ी पर काम किया।

वरुण बरनवाल, आईएएस, गुजरात कैडर

वरुण बरनवाल, आईएएस, गुजरात कैडर

(IAS Varunkumar Baranwal) वरुण कुमार बरनवाल मूलरूप से महाराष्ट्र के पालघर जिले के बोईसर के रहने वाले हैं। इनके पिता साइकिल के पंक्चर बनाने की दुकान चलाते थे। साल 2006 तक वरुण बरनवाल की जिंदगी में सब कुछ ठीक था, मगर जब इन्होंने दसवीं कक्षा की परीक्षा दी उसके चार दिन बाद पिता का हार्ट अटैक की वजह से निधन हो गया।

 मां ने बेटे वरुण को पढ़ाई नहीं छोड़नी दी

मां ने बेटे वरुण को पढ़ाई नहीं छोड़नी दी

पिता की मौत के बाद मां ने बेटे वरुण को पढ़ाई नहीं छोड़नी दी। वरुण ने पढ़ाई के साथ-साथ अपने पिता की साइकिल ​रिपेयर की दुकान संभाल ली। दसवीं के टॉपर रहे वरुण की 11वीं व 12वीं की फीस स्कूल ​टीचर्स ने मिलकर भरी। कॉलेज में दाखिले की फीस के दस हजार रुपए उस डॉक्टर ने अपनी जेब से खर्च किए जिन्होंने वरुण के पिता का इलाज किया था। कॉलेज में प्रवेश पाकर वरुण ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

 स्कॉलरशिप मिलने लगी तो हालात थोड़े सुधरे

स्कॉलरशिप मिलने लगी तो हालात थोड़े सुधरे

कॉलेज टॉप करने के बाद इन्हें स्कॉलरशिप मिलने लगी तो हालात थोड़े सुधरे। इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने जॉब शुरू की। इस बीच वरुण कुमार बरनवाल ने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। साल 2013 में 32वीं रैंक हासिल कर गुजरात कैडर में आईएएस बन गए।

आईएएस वरुण बरनवाल की जीवनी

आईएएस वरुण बरनवाल की जीवनी

नाम - वरुण कुमार बरनवाल

जन्मदिन - 05/10/1990
निवासी - गांव बोईसर, पालघर महाराष्ट्र
पिता - जगदीश बरनवाल
भाई-बहन - दो बहन व एक भाई
वर्तमान पद - रिजनल कमिश्नर मुंसीपलटी राजकोट

मनोज कुमार रॉय, IOFS

मनोज कुमार रॉय, IOFS

साल 2010 में UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 870 हासिल कर इंडियन ऑर्डनेंस फैक्ट्री (Indian Ordnance Factories Service) में नियुक्त हुए मनोज कुमार रॉय बिहार के सुपौल के रहने वाले हैं। साल 1996 में मनोज कुमार सुपौल से दिल्ली चले आए। दिल्ली में उन्होंने अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए अंडे और सब्जियों का ठेला लगाया। फिर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में राशन पहुँचाने का काम करने लगे।

अंडे और सब्जियाँ बेचते हुए बीए पूरा किया

अंडे और सब्जियाँ बेचते हुए बीए पूरा किया

इसी दौरान मनोज की मुलाकात बिहार के रहने वाले छात्र उदय कुमार से हुई। उदय ने मनोज को अपनी पढ़ाई करने की सलाह दी ताकि अंडे व सब्जी ना बेचना पड़े। मनोज ने दिल्ली की श्री अरबिंदो कॉलेज (इवनिंग क्लासेज) में दाखिला लिया और अंडे और सब्जियाँ बेचते हुए वर्ष 2000 में बीए पूरा किया।

फिर उदय की ही सलाह से मनोज कुमार रॉय ने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। साल 2005 में पहली बार यूपीएससी का एग्जाम दिया, लेकिन सफल नहीं हुए। चौथे प्रयास में साल 2010 की यूपीएससी परीक्षा में मनोज को सफलता मिली। रैंक अधिक होने के कारण इन्हें Indian Ordnance Factories Service कैडर मिला। मनोज कुमार की पहली पोस्टिंग उनके गृह राज्य बिहार के नालंदा जिले में राजगीर ऑर्डनेंस फैक्ट्री में एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में मिली।

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