• search
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

    सवर्ण आरक्षण कार्ड खेलकर मोदी सरकार 2019 में कर पाएगी वापस

    By विनोद कुमार शुक्ला
    |

    नई दिल्ली: केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आर्थिक रुप से पिछड़े सवर्ण जातियों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी को 2019 के लोकसभा चुनाव में मदद मिल सकती है। लेकिन इस फैसले के उलटा पड़ने के डर से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। सरकार के इस फैसले को लागू करने से पहले कई मुश्किलों से गुजरना पड़ेगा।

    bjp can back in center after providing reservation to upper cast in lok sabha election 2019

    दरअसल इस संबंध में निर्णय कई महीने पहले ले लिया गया था और लोक जनशक्ति पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने कहा कि वो ना सिर्फ इसके साथ थे बल्कि वो सवर्ण जातियों के गरीब लोगों को आरक्षण मिलने का समर्थन करते हैं। पासवान की पार्टी ने हमेशा इसे अपने घोषणापत्र में शामिल किया है। लेकिन ये फैसला लेकर मोदी सरकार अपर कास्ट के गुस्से को शांत कर उनका दिल जीतने की कोशिश कर रही है.

      Upper Caste Reservation : Modi Governmment के सवर्ण बिल से किसे और कैसे मिलेगा लाभ, WATCH VIDEO

      सरकार को ऐसी सूचनाएं मिली हैं कि भाजपा मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव सवर्ण जातियों के गुस्से की वजह से हारी है। मध्यप्रदेश में इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा। उत्तरप्रदेश से मिल रही रिपोर्ट से भी भाजपा नेता सकते में हैं। सवर्ण जातियों के लोग सूबे में राजपूत और भगवा प्रतीक के व्यक्ति को सूबे में सत्ता सौंपने के बावजूद भाजपा को समर्थन नहीं कर रहे हैं।

      हिंदी पट्टी के राज्यों से भाजपा को अच्छी रिपोर्ट नहीं मिल रही हैं. ऐसे में देश के अन्य हिस्सों में भाजपा का हश्र क्या होगा. भाजपा लंबे समय से कोशिश कर रही है है कि सवर्ण जातियों को लोगों को अपने पाले में रखा जा सके। लेकिन वो कुछ नहीं कर पा रही है। उच्च जातियों के लोगों को आरक्षण का पार्टी को उसी तरह नुकसान हो सकता है जैसा कि एससी/एसटी एक्ट मामले में हुआ।
      भाजपा ने एससी/एसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिए फैसले को संसोधन करके पलट दिया था। लेकिन सवर्ण जातियों को ये फैसला ठीक नहीं लगा। उनका मानना था कि इस फैसले को संसद में पलटने की जरूरत नहीं थी। लेकिन भाजपा ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग पूरी तरह भाजपा के पक्ष में लामबंद हो जाएंगे। लेकिन एससी/एसटी समुदाय के लोगों का कहना था कि उन्होंने सड़क पर संघर्ष करके इसे पाया।

      इस मामले में कई हिस्सेदार सामने आए और उन्होंने भाजपा को स्वीकृति नहीं दी। लेकिन उच्च जाति के लोग इस फैसले से गुस्से से भर गए और मध्यप्रदेश में भाजपा के खिलाफ अभियान चलाया। अब केंद्रीय कैबिनेट ने 10 फीसदी आरक्षण को मंजूरी दे दी है। जिसे कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। अन्य पिछड़ा वर्ग और एससी/एसटी के लोग इस फैसले को उनके अधिकारों के पर अतिक्रमण कहेंगे।

      लोकसभा चुनाव में ये फैसला भाजपा के खिलाफ भी जा सकता है अगर इसे सही तरीके से नहीं संभाला गया. ऐसे जोखिम वाले कुछ फैसले लेकर भाजपा 2019 लोकसभा चुनाव जीतना चाहती है लेकिन ये फैसले मनमुताबक रिजल्ट देते नहीं दिखाई दे रहे हैं। हालांकि उसके सहयोगी इस फैसले को सही तरीक से ले रहे हैं और ये भाजपा को फायदा करेगा. लेकिन ये निश्चित है कि ये विभाजन की एक और अंकुर हैं जो स्वस्थ समाज के लिए अच्छा नहीं है। इसके साथ ही सवर्ण जाति के गरीब लोगों के आरक्षण की मांग कुछ संगठन करते आ रहे थे। वो दावा करेंगे कि ये उनकी उपलब्धि है।

      जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

      देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
      English summary
      bjp can back in center after providing reservation to upper cast in lok sabha election 2019
      For Daily Alerts

      Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
      पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

      Notification Settings X
      Time Settings
      Done
      Clear Notification X
      Do you want to clear all the notifications from your inbox?
      Settings X
      X
      We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more