महाराष्ट्र चुनावः कुछ इस तरह कांग्रेस का हो सकता है सफाया
16वें लोकसभा चुनाव में भाजपा-आरएसएस ने नरेंद्र मोदी को राजनीतिक मार्केट में जिस तरह से जल्दी एक बड़ा ब्रांड बनाकर पेश कर दिया। उससे ऐसा माहौल निर्मित हुआ जिसमें हर युवा नरेंद्र मोदी का चहेता हो गया। लोकसभा चुनाव को खत्म हुए अभी ज्यादा समय नहीं बीता है। अभी भी वही भावनाएं और सहानुभूति भारतीय युवाओं और लोगों में बनी हुई है। अगर ऐसा ही रहा तो कांग्रेस का महाराष्ट्र से सफाया होना तय माना जा रहा है। इसको हम नीचे आंकड़ों से पुख्ता बनाने की कोशिश करेंगे।

अगर हम गत विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो पता लगेगा कि शिवसेना और एनसीपी का जनाधार घटा है। दरअसल, वर्ष 2004 के विधानसभा चुनाव में एनसीपी ने 71 सीटें जीती थीं जो 2009 विधानसभा चुनाव में घटकर 62 रह गई। वहीं इस दौरान कांग्रेस की सीट बढ़ गईं। 2004 में 69 थी तो 2009 में बढ़कर 82 हो गई। भाजपा ने 2004 में 54 सीटों पर विधानसभा सीट जीती तो 2009 में भाजपा की सीट घटकर 46 रह गईं। शिवसेना की 2004 62 सीटें थीं तो यह 2009 में घटकर 45 ही रह गईं।
यहां ऐसा लग रहा है जैसे कांग्रेस का जनाधार बढ़ रहा है। लेकिन थोड़ा गहराई में जाएं तो लब्बोलुआब कुछ यूं है कि जिस दौरान कांग्रेस महाराष्ट्र में जीती औऱ उसका वोटबैंक बढ़ा उस दौरान केंद्र में कांग्रेसनीत यूपीए की सरकार रही है। यानी लोकसभा चुनाव के माहौल का असर महाराष्ट्र में पड़ता है। सीधे तौर कहा जाए तो यह कहने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि केंद्र के मुद्दे महाराष्ट जैसे राज्यों में रह रही जनता को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं।
अब केंद्र में ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए भाजपा ने अपनी सरकार बनाई है। चाहे कैसे भी। इससे सभी वाकिफ हैं कि अभी नरेंद्र मोदी के नाम पर निर्मित हुआ माहौल बरकरार है। ऐसे माहौल में इसकी पूरी संभावनाएं हैं कि भाजपा इस बार चाहे बहुमत लेकर न आए लेकिन बाजी मार ले जा सकती है।
पिछले लोकसभा चुनावों के नतीजों के आधार पर अंत में एक बात थोड़ा स्पष्ट रूप से कहें तो लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का जनाधार लगातार घट रहा है। क्योंकि 2014 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 2 सीटें ही जीतीं तो वहीं गत 2009 के लोकसभा चुनाव में 17 सीटों पर जीत हासिल की थी।












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