बार एसोसिएशन ने शिवसेना नेता संजय राउत के खिलाफ दायर की अवमानना याचिका
मुंबई, 20 अप्रैल। शिवसेना के सांसद और वरिष्ठ नेता संजय राउत को हाई कोर्ट के जज पर आरोप लगाना भारी पड़ा है। इंडियन बार एसोसिएशन ने अवमानना नोटिस के साथ पीआईएल दायर की थी। बार ने जजों के खिलाफ झूठे और गलत आरोप लगाने के चलते संजय राउत के खिलाफ अवमानना और जनहित याचिका दायर की है। बार एसोसिएशन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि संजय राउत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के जजों और पूरी न्यायपालिका के खिलाफ गलत आरोप लगाए हैं। दरअसल कोर्ट ने भाजपा नेता किरीट सोमैया को राहत दी थी, जिसे संजय राउत ने पक्षपातपूर्ण बताया था।
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संजय राउत ने कहा था कि कोर्ट ने भाजपा से जुड़े लोगों को राहत दीहै, लेकिन शिवसेना और एनसीपी से जुड़े लोगों को कोई राहत नहीं दी। संजय राउत ने जेल मंत्री नवाब मलिक और अनिल देशमुख की ओर इशारा करते हुए कोर्ट के रुख पर सवाल खड़ा किया और कहा कि कोर्ट ने किरीट सोमैया को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया है। जबकि बाकी के लोगों को कोई राहत नहीं दी है। बता दें कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री दिलिप वाल्से पाटिल और सामना की एडिटर रश्मि ठाकरे का भी नाम इस अवमानना की नोटिस में शामिल कियागया है।
गौर करने वाली बात है कि पिछले हफ्ते राउत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले पर सवाल खड़ा किया था जिसमे भाजपा नेता किरीट सोमैया को कोर्ट ने गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी। राउत ने कहा था कि सेव विक्रांत एक घोटाला है, करोड़ो रुपए इसके लिए इकट्ठा किए गए और इसे डकार लिया गया, कोर्ट से राहत का मतलब यह नहीं है कि किसी पर भ्रष्टाचार के आरोप खत्म हो गए। जो पैसा इकट्ठा किया गया वह राज भवन नहीं पहुंचा। यही वजह है कि लोगों का न्यायपालिका से विश्वास खत्म हो गया है। राहत घोटाला कोर्ट पर धब्बा है। यह अल कायदा से भी ज्यादा गंभीर है। आखिर कैसे सिर्फ दूसरे दल के लोग ही इस घोटाले से लाभान्वित हुए हैं। यह बड़ा सवाल है। विक्रांत के फंड के गलत इस्तेमाल का मामला अभी खत्म नहीं हुआ है, दोषियों को सजा मिलेगी, आप इंतजार कीजिए और देखिए।












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