बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख की FIR रद्द करने की मांग वाली याचिका को किया खारिज
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई की ओर से अपने ऊपर दर्ज की गई एफआईआर को खारिज करने की मांग की थी।
मुंबई, 22 जुलाई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अनिल देशमुख को करारा झटका दिया। कोर्ट ने अनिल देशमुख की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई की ओर से अपने ऊपर दर्ज की गई एफआईआर को खारिज करने की मांग की थी। इसके अलावा अदालन ने राज्य सरकार की उस याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें उसने अनिल देशमुख के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर के कुछ अंशों को लेकर चुनौती दी थी।

देशमुख ने मांग की थी कि यह प्राथमिकी बिना किसी आपत्तिजनक सामग्री के उनकी छवि को बदनाम करने के मकसद से की गई है, इसलिए इसे खारिज किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि सीबीआई अनिल देशमुख और उनके सहयोगियों से जुड़े तबादलों और पोस्टिंग की वैध तरीके से जांच कर सकती है।
5 अप्रैल को, मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता के नेतृत्व में हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने मामले को अभूतपूर्व करार दिया था और वकील जयश्री पाटिल की एक शिकायत के आधार पर मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह द्वारा 20 मार्च को लिखी चिट्ठी (जिसमें अनिल देशमुख पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये गए थे) का हावाला देते हुए देशमुख के खिलाफ जांच का आदेश दिया था।23 जून को, न्यायमूर्ति एस एस शिंदे और न्यायमूर्ति एन जे जमादार की खंडपीठ ने राज्य सरकार की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था और उसी दिन देशमुख की याचिका पर अंतिम सुनवाई शुरू की थी, जो 12 जुलाई को समाप्त हुई थी। हाईकोर्ट के आदेश के कुछ ही घंटों बाद देशमुख ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
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मुंबई पुलिस आयुक्त के पद से हटाए जाने और होम गार्ड्स में तैनाती मिलने के 3 दिन बाद परम बीर सिंह ने 20 मार्च को अनिल देशमुख पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा। पत्र में आरोल लगाया गया कि देशमुख ने निलंबित और गिरफ्तार सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वेज़ को हर महीने 100 करोड़ रुपये इकट्ठा करने के लिए कहा, जिसमें मुंबई में 1,750 बार और रेस्तरां से 40-50 करोड़ रुपये शामिल हैं। प्रारंभिक जांच के बाद सीबीआई ने देशमुख और अन्य अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, जिसके बाद राज्य सरकार ने एफआईआर के कुछ अंशों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था।












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