Morena News: चंबल और बीहड़... हत्याकांड की हर कहानी के पीछे ‘जमीन विवाद’, 'हथियार' यहां स्टेटस सिंबल
जमीन विवाद में लाशों के ढेर लगाना, बंदूकों की दम पर जमीन पर कब्जा...चंबल का इलाका कुख्यात रहा है। बीहड़ के डकैतों की हर कहानी में जमीन बड़ा कारण रही हैं। शुक्रवार को मुरैना के हत्याकांड में फिर इतिहास दोहराया गया है।

कहते हैं चंबल नदी का पानी बागी बना देता है... काफी हद तक यह सत्य भी है। चंबल इलाके के भिंड और मुरैना जिले सहित आसपास के इलाके में अब तक जितनी हत्याएं और नरसंहार हुए उतने शायद ही कहीं और हुए हों, लेकिन एक सत्य और भी है कि यहां जमीन को लोग मान, प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रतीक मानते हैं और हर बड़े हत्याकांड के पीछे जमीन का विवाद ही सामने आता रहा है। यहां लोगों के लिए जमीन जर और जोरू से ज्यादा आत्मसम्मान की बात होती है। इस कारण बात जब जमीन पर कब्जे की आती है तो यहां खून की होली खेला जाना आम बात है।
देश-विदेश में मप्र का चंबल का इलाका, बीहड़, भिंड और मुरैना हमेशा से डाकुओं, हत्याकांड और नरसंहार के साथ-साथ हत्याओं के लिए कुख्यात रहा है। बीहड़ के डाकुओं के आत्मसमर्पण और खात्में के बावजूद यहां जब-तब नरसंहार और हत्याएं की घटनाएं सामने आती रही हैं। अमूमन हर बड़ी घटना के पीछे यहां 'जमीन' विवाद से जुड़ा कारण सामने आया है। मुरैन के मुरैना के लेपा-भिड़ोसा में महिलाओं सहित छह की गोली मारकर हत्या की वारदात के पीछे भी 'जमीन' से जुड़ा विवाद सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आया है। जिसमें सुबह-सुबह पुराने विवाद को लेकर एक पक्ष ने दूसरे के घर पहुंचकर हमला कर दिया और एक ही परिवार के छह लोगों को सड़क पर ही गोलियों से भून दिया।
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'जमीन' यहां दबदबे और प्रतिष्ठा का प्रतीक
दरअसल चंबल इलाके में राजा-रजवाड़ों के समय से ही जमींदार और मालगुजार प्रथा हावी रही है। यहां जातिगत और जमीनी विवाद सबसे ज्यादा होते हैं। हमेशा से जमीन को लेकर वर्चस्व की लड़ाई में यहां की मिट्टी खून से लाल होती रही है। जमीन के अलावा याहां किसी अन्य चीज को यहां संपत्ति नहीं माना जाता। दबदबा उसकी का रहता है, जिसके पास सबसे ज्यादा जमीन होती है। बता दें कि मुरैना के लेपा-भिड़ोसा जिस गांव में शुक्रवार को नरसंहार में 6 को मार दिया गया, उसी गांव में सेना से रिटायर्ड व अंतरराष्ट्रीय स्तर का एथलीट पान सिंह तोमर भी जमीन विवाद के कारण ही डकैत बना था। उसके अलावा ऐसे दर्जनों उदाहरण यहां मौजूद हैंं।
हर घर में बंदूकें मिल जाएंगी
चंबल के मुरैना, भिंड इलाके की पहचान एक और कारण से है। यहां अमूमन हर घर में बंदूके मौजूद हैं। बंदूक इस इलाके का स्टेटस सिंबल है। परिवार में किसी न किसी व्यक्ति के पास बंदूक का लाइसेंस और हथियार जरूर मिलेंगे। मप्र में सबसे ज्यादा हथियार के लाइसेंस इसी इलाके में जारी किए गए हैं। कई बड़े परिवारों में तो हथियारों का जखीरा निकलना कोई अचरज नहीं है।
कब-कब हुए खूनी संघर्ष
शुक्रवार के खूनी खेल के पहले बीते साल इसी इलाके में चुनावी रंजिश के चलते हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। इसके पहले बड़े हत्याकांड के रुप में जो दर्ज है उसमें 30 जून 1995 को नंदपुरा गांव में एक परिवार के लोगों ने दूसरे परिवार के 7 लोगों की गोली मारकर हत्या की थी। आरोपियों की जमीन पर मृतकों ने कब्जा कर रखा था। पुलिस-प्रशासन ने जब नहीं सुना तो सरेआम दबंगों का खून बहाया गया था। इसके पूर्व 29 जून 1978 को जिले के देवगढ़ थाने के नंदपुरा गांव में जमीन विवाद में एक किसान ने 5 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।












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