Chhajlet मामले में आजम खान और उनका बेटा अब्दुला दोषी करार, स्पेशल कोर्ट ने सुनाई 2-2 साल की सजा
Chhajlet Case: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान की मुश्किलें बढ़ गई है। 15 साल पुराने छजलैट मामले में मुरादाबाद की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बाप-बेटे को दो-दो साल की सजा सुनाई है।

Chhajlet Case: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान (Azam Khan) और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान (Abdullah Azam Khan) की मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। 15 साल पुराने छजलैट (Chhajlet ) मामले में आजम खान और उनके बेटे अब्दुला को मुरादाबाद (Moradabad) की एमपी-एमएलए कोर्ट ने तगड़ा झटका देते हुए दोषी करार दिया है। स्पेशल कोर्ट ने बाप-बेटे को दो-दो साल की सजा सुनाई है। तो वहीं, इस मामले में अन्य सात आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोष मुक्त कर दिए गए।
दरअसल, ये मामला 15 साल पुराना है। 20 जनवरी 2008 को छजलैट पुलिस ने आजम खान की गाड़ी चेकिंग के लिए रुकवाई थी। आजम खान की गाड़ी रोके जाने पर उनके समर्थक भड़क गए थे और जमकर हंगामा किया था। इस मामले में आजम खान, अब्दुल्ला आजम समेत 9 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में हंगामा करने वाले सभी लोगों पर सरकारी काम में बाधा डालने और भीड़ को उकसाने के आरोप में केस दर्ज किया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई बार समन जारी होने के बाद भी आजम खान एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में पेश नहीं हुए थे। इस मामले में आजम के खिलाफ 2020 में अदालत ने अवमानना का मुकदमा दर्ज कराया था। हालांकि, वो इस मामले में 06 फरवरी को कोर्ट में पेश हुए और अपने बयान दर्ज कराए थे। इसे मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। विशेष लोक अभियोजक मोहन लाल विश्नोई ने बताया कि अदालत पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी करार दिया है।
वहीं, मुरादाबाद देहात विधान सभा क्षेत्र से पूर्व विधायक हाजी इकराम कुरैशी, बिजनौर की नूरपुर विधानसभा सीट के पूर्व विधायक नईम ऊल हसन, नगीना से सपा विधायक मनोज पारस, अमरोहा के सपा विधायक महबूब अली, राजेश यादव, डी पी यादव,पूर्व महानगर अध्यक्ष राजकुमार प्रजापति को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया है। हालांकि, कोर्ट ने आजम खान को इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए 20 फरवरी की तारीख दी गई है।
आजम खान को सजा मिलने को लेकर वकील नितिन गुप्ता ने बताया कि यह मामला 2008 का था, उस गाड़ी को रोका गया था जिसमें काले शीशे लगे थे। काले शीशों पर फिल्म चढ़ी हुई थी और लाल बत्ती के साथ हूटर भी लगा हुआ था। वकील ने कहा, गाड़ी चेकिंग के दौरान ना तो उसमें सवाल लोग गाड़ी के कागज दिखा पाए थे और ना ही ड्राइविंग लाइसेंस दिखाया था। जब कागत मांगा गया तो अफरा-तफरी मचा कर लॉ एंड ऑर्डर खराब करने की कोशिश की गई थी।
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इस मामले में आज सजा सुनाई गई है। इस केस में कुछ 9 नामजद हुए थे, जिनमें 7 लोगों को बरी कर दिया गया था। जबकि अब्दुल्ला और आजम खान को 2-2 साल की अधिकतम सजा सुनाई गई है। हालांकि, दोषी ठहराये जाने के बाद आजम खान और उनके बेटे ने जमानत की अर्जी दी थी जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत दे दी।












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