मेरठ: करोड़ों की NCERT की नकली किताबों का मास्टरमाइंड है भाजपा नेता संजीव गुप्ता का बेटा
मेरठ। आर्मी इंटेलिजेंस की सूटना पर मेरठ में यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने परतापुर थाना क्षेत्र के एक गोदाम में छापा मारा। छापेमारी में करीब 35 करोड़ रुपए की नकली एनसीईआरटी की किताबें पकड़ी गई हैं। छह प्रिंटिंग मशीनें मिली हैं। पुलिस ने मौके से करीब 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। मेरठ के एसएसपी अजय साहनी मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि नकली किताबें छापने का मास्टरमाइंड सचिन गुप्ता है। वह भाजपा नेता संजीव गुप्ता का बेटा है।

फरार है सचिन गुप्ता
मेरठ के एसएसपी अजय साहनी और एसटीएफ मेरठ यूनिट के डीएसपी ब्रजेश कुमार सिंह ने मीडिया को संयुक्त जानकारी देते हुए बताया कि परतापुर के अछरौंडा में गोदाम और मोहकमपुर की प्रिंटिंग प्रेस का मालिक सचिन गुप्ता है। फिलहाल वह फरार है। उसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। छापेमारी के तुरंत बाद सचिन से पुलिस अधिकारियों की फोन पर बातचीत हुई। उसने कहा कि वह किताबों के कागजात लेकर आ रहा है, लेकिन बाद में नहीं आया और मोबाइल भी बंद कर लिया।

भाजपा नेता संजीव गुप्ता का बेटा है सचिन गुप्ता
उधर, गोदाम पर छापे की जानकारी मिलते ही सचिन गुप्ता मोहकमपुर स्थित अपनी टीएनएचके प्रिंटर एंड पब्लिशर की फर्म में आग लगाकर फरार हो गया। मौके पर पहुंची फायर बिग्रेड की गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझाई। वहीं, एसटीएफ के सब इंस्पेक्टर संजय सोलंकी ने सचिन गुप्ता सहित प्लांट सुपरवाइजर व चार-पांच अन्य लोगों के खिलाफ कई धाराओं में परतापुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। सचिन गुप्ता के बारे में पता चला है कि वह संजीव गुप्ता का बेटा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संजीव गुप्ता गांधी संकल्प पदयात्रा का मेरठ-हापुड़ लोकसभा का संयोजक भी रह चुका है।

कॉपीराइट और पायरेसी एक्ट के तहत होगी कार्रवाई
वहीं, दूसरी और पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि सचिन गुप्ता पूर्व में यूपी बोर्ड की डुप्लीकेट किताबें छाप चुका है। हालांकि उस मामले में कार्रवाई हुई थी अथवा नहीं, यह पता नहीं चल पाया है। इस संबंध में थाने से पुराना रिकॉर्ड निकलवाया जा रहा है। साथ ही पूरे मामले से शिक्षा विभाग के स्थानीय अधिकारियों, जीएसटी और एनसीईआरटी अधिकारियों को अवगत करा दिया है। उन्होंने बताया कि मामले में आईपीसी की धाराओं के साथ ही कॉपीराइट और पायरेसी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।












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