UP politics 2025: मऊ सीट पर कौन होगा उम्मीदवार? NDA में मंथन शुरू, राजभर बनाम निषाद
UP politics 2025: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है। सुभासपा नेता अब्बास अंसारी को हेट स्पीच मामले में दो साल की सजा मिलने के बाद मऊ विधानसभा सीट खाली हो गई है। अब नियमों के अनुसार यहां छह महीने के भीतर उपचुनाव कराया जाएगा।
इस संभावित उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की बयानबाजी तेज हो गई है। एनडीए के सहयोगी और निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने साफ किया है कि वह भाजपा के साथ खड़े हैं और गठबंधन की मर्यादा का पालन करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर को सलाह दे डाली है।

डॉ. निषाद ने कहा कि एनडीए में भाजपा बड़े भाई की भूमिका में है और छोटे दलों को उसी के अनुसार चलना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि भाजपा ना सिर्फ मऊ सीट गठबंधन के किसी साथी को देगी, बल्कि सबकी समस्याओं का समाधान भी करेगी।
बीजेपी पर जताया भरोसा, जीत को बताया प्राथमिकता
डॉ. संजय निषाद ने कहा कि सीट किसे मिलेगी, यह बाद की बात है। फिलहाल प्राथमिकता एनडीए की जीत होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी की पूरी निष्ठा भाजपा के साथ है और वे भाजपा के हर फैसले का समर्थन करेंगे।
इसके अलावा, निषाद पार्टी प्रमुख ने यह भी दावा किया कि मऊ उपचुनाव में एनडीए ही जीत दर्ज करेगा। उनका मानना है कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से जनता संतुष्ट है, जिससे वोटरों का रुझान गठबंधन की ओर रहेगा।
राजभर को सीट की जिद छोड़ने की सलाह
डॉ. निषाद ने सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें सीट को लेकर हठ नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले भी मंझवा और कटेहरी जैसी सीटें भाजपा ने लड़ी थीं और जीत हासिल की थी, जिसमें सभी सहयोगी दलों का सहयोग था।
उनका मानना है कि किसी एक दल को सीट पर दावा ठोकने से बेहतर है कि मिलजुलकर रणनीति बनाई जाए ताकि विपक्ष को हराया जा सके। इससे गठबंधन की एकता भी बनी रहेगी और राजनीतिक संदेश भी मजबूत जाएगा।
राजभर की ओर से उठाए गए आरक्षण मुद्दे को लेकर भी डॉ. संजय निषाद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ओमप्रकाश राजभर की चिंता सही हो सकती है, लेकिन उसका हल सिर्फ भाजपा के पास है। उन्होंने कहा कि भाजपा ही वह पार्टी है जो सामाजिक न्याय को लेकर ठोस कदम उठाने में सक्षम है।
इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अगर राजभर भाजपा के निर्णय को स्वीकार करते हैं तो ना सिर्फ सीट का समाधान होगा, बल्कि उनके आरक्षण संबंधित मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा।












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