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Krishna Janmashtami 2022: यहां रात में रास रचाते हैं कान्‍हा, छोड़ जाते हैं निशानियां!

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मथुरा/वृंदावन। 18-19 अगस्‍त को जन्‍माष्‍टमी है। इस अष्‍टमी को श्रीकृष्ण के जन्‍मोत्‍सव के रूप में मनाया जाता है। ग्रंथों के अनुसार, साढ़े 5 हजार बरस पहले द्वापर युग था, तब भगवान विष्‍णु ने मनुष्‍य-योनि में श्रीकृष्ण का अवतार लिया था। श्रीकृष्ण मथुरा की एक जेल में जन्‍मे, जिसे कंस का कारागार कहा जाता था। जो मथुरा शहर है, उस समेत उसके आस-पास के धर्मस्‍थलों को ब्रजभूमि कहा जाता है। पूरी ब्रजभूमि श्रीकृष्ण के किशोरावस्‍था तक की लीलाओं की गवाह रही है।

श्रीकृष्ण जन्‍माष्‍टमी के इस अवसर पर, आज हम आपको ब्रजभूमि के एक स्‍थान के बारे में बता रहे हैं, जिसके बारे में मान्‍यता है कि वहां कृष्ण बालरूप में अब भी सखा-सखियों के साथ रास रचाते हैं। हां जी, यह स्‍थान है वृंदावन का - निधिवन। जहां तुलसी-कदम्‍ब जैसे पेड़ हैं। यहीं झाडियों के बीच एक छोटा-सा महल है- रंग महल। जहां आज भी कन्‍हैया के रास से जुड़ी निशानियां मिलती हैं।

श्रीकृष्ण की लीलाओं की गवाह रही ब्रजभूमि

श्रीकृष्ण की लीलाओं की गवाह रही ब्रजभूमि

ब्रज में 20 वर्षों से भक्‍तों को श्रीकृष्ण की कथाएं सुना रहे भगवानसिंह ठाकुरदास कहते हैं कि, ब्रजभूमि का कोना-कोना भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का गवाह रहा है। यहां ऐसे अनेक स्‍थान हैं, जहां श्रीकृष्ण के जन्‍म से लेकर किशोरावस्‍था तक की घटनाओं की निशानियां मिलती हैं। श्रीकृष्ण सखा-स‍खियों के साथ रास रचाते थे। उनके हाथ में मुरली, सिर पर मोरपंख का मुकुट और आस-पास गाय-बछड़े होते थीं। उन्‍होंने वृंदावन को जग में सबसे न्‍यारा बताया था। इसलिए, वृंदावन के पग-पग इलाके में राधा-कृष्ण की गूंज सुनाई देती है।

यहां चहुंओर राधा-कृष्ण की गूंज सुनाई देती है

यहां चहुंओर राधा-कृष्ण की गूंज सुनाई देती है

भगवानसिंह ठाकुर ने कहा कि, वृंदावन में एक वन है- निधिवन। जहां तुलसी-कदम्‍ब जैसे पेड़ हैं। यहीं झाड़ों के बीच एक छोटा-सा महल है- रंग महल। यही वो महल है, जिसके बारे में मान्‍यता है कि यहां आज भी कान्‍हा रात को रास रचाते हैं। मगर उन्‍हें कोई देख नहीं पाता। शाम ढलते ही निधिवन दर्शकों के लिए बंद कर दिया जाता है। उसके बाद यहां कोई नहीं रहता। विशेषकर, शरद पूर्णिमा की रात, निधिवन में प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहता है।

कंस के कहने पर जहरीला दूध पिलाने आई पूतना को जहां दुधमुंहे कृष्ण ने मारा था, अब ऐसी दिखती है वो जगहकंस के कहने पर जहरीला दूध पिलाने आई पूतना को जहां दुधमुंहे कृष्ण ने मारा था, अब ऐसी दिखती है वो जगह

जोड़े में लहलहाती हैं तुलसी की लताएं

जोड़े में लहलहाती हैं तुलसी की लताएं

निधिवन के सेवायत गोस्वामी कहते हैं, 'यह कन्‍हैया की माया है, उनकी अब भी रासलीला होती है। तुलसी की जो लताएं हैं, वही गोपिका बन जाती हैं और वन के अन्‍य पेड़ ग्‍वाल-बाल।'

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रात को कोई इंसान नहीं रुकता

रात को कोई इंसान नहीं रुकता

वृंदावन के लोग बताते हैं कि, दिन में यहां श्रद्धालुओं के आवागमन पर कोई रोक नहीं है। मगर, शाम होते ही निधिवन को खाली करा लिया जाता है। कहते हैं कि यहां जिसने रात को रुककर रासलीला देखने की कोशिश की, वो होश खो बैठा, पागल हो गया।

बहुत रहस्यमयी है यह महल, यहां रोज आते हैं कृष्ण, छोड़ जाते हैं निशानियां, PHOTOSबहुत रहस्यमयी है यह महल, यहां रोज आते हैं कृष्ण, छोड़ जाते हैं निशानियां, PHOTOS

'सुबह होने पर वहां कुछ नहीं मिलता'

'सुबह होने पर वहां कुछ नहीं मिलता'

कुछ लोग निधिवन में यही जानने आते हैं कि भला रात को क्‍या होता होगा। निधिवन में राधा रानी का प्राचीन मंदिर है। इसके अलावा 'रंग महल' वो जगह है, जिसकी छत के नीचे श्रीकृष्ण के लिए सूर्यास्‍त के बाद भोग रखा जाता है, दातून रखी जाती है। लेकिन सुबह होने पर वहां कुछ नहीं मिलता। इसलिए, भक्‍त कहते हैं कि कान्हा निशानियां भी छोड़ जाते हैं।

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English summary
Lord krishna radha rasleela Nidhivan vrindavan : Nidhivan vrindavan story in hindi, Lord krishna radha raslila in rangmahal
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