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सफेद संगमरमर और सतरंगी रोशनी से जगमगाते इस मंदिर में हैं 94 कलामंडित स्तंभ, कर देते हैं मंत्रमुग्ध, PHOTOS

मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली और उनकी रासलीलाओं के लिए विश्वविख्यात मथुरा जिले में सालभर में करोड़ों श्रद्धालु मंदिरों के दर्शन करने आते हैं। वैसे तो इस पूरे जिले में हजारों मंदिर हैं, लेकिन कुछ मंदिर अपने अनोखे आकार, आकर्षण और अकूत संपत्ति के लिए अधिक प्रसिद्ध हैं। Oneindia.com की 'झलक ब्रज की' सीरीज के तहत आज हम आपको कराएंगे ऐसे मंदिर के दर्शन, जो सफेद संगमरमर से बना है और जिसकी सतरंगी रोशनी से लोग चौंधिया जाते हैं। वृंदावन का यह मंदिर विदेशियों के बीच सर्वाधिक पसंद है। दीवाली, जन्माष्टमी और होली के मौके पर इसके अद्भुत दृश्य श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।

वृंदावन में है 94 कलामंडित स्तंभों वाला प्रेम मंदि‍र

वृंदावन में है 94 कलामंडित स्तंभों वाला प्रेम मंदि‍र

मंदिरों की नगरी वृंदावन में 54 एकड़ भूमि में सफेद संगमरमर से बना अद्भुत देवालय है 'प्रेम मंदिर'। यह मंदिर 125 फुट ऊंचा, 122 फुट लंबा और 115 फुट चौड़ा है। मंदिर के अंदर भगवान राधा-कृष्ण और सीता-राम का खूबसूरत फूल बंगला भक्‍तों के लि‍ए आकर्षण का केंद्र रहे हैं। इस मंदिर के दृश्य और कांति देख व्यक्ति का प्रेम जाग उठता है। यहां कई तरह के फूलों के खूबसूरत बगीचे लगाए गए हैं। फव्वारे, श्रीकृष्ण और राधा की मनोहर झांकियां, श्रीगोवर्धन धारणलीला, कालिया नाग दमनलीला, झूलन लीलाएं बेहतर तरीके से दिखाई गई हैं।

किसी का भी मन मोह सकती है सतरंगी रोशनी से जगमगाहट

किसी का भी मन मोह सकती है सतरंगी रोशनी से जगमगाहट

जो लोग इस मंदिर के दर्शन करने शाम साढ़े 6 बजे आते हैं, वे पल-पल जीती पीला, हरा, नीला, गुलाबी सहित सात रंगों वाली जगमगाहट पर लट्टू हो जाते हैं। भव्य मंदिर बाहर से देखने पर जितना खूबसूरत लगता है, उतना ही अंदर से भी मन को मोहता है। इस मंदिर की खूबसूरती को देखने के लिए रोज हजारों लोगों की भीड़ पहुंचती है। भक्‍ति‍ भाव में डूबे हुए भक्त सीता-राम और राधे-राधे बोले बिना नहीं रह पाते।

दीवारों पर हर तरफ वर्णित है राधा-कृष्ण की रासलीला

दीवारों पर हर तरफ वर्णित है राधा-कृष्ण की रासलीला

प्रेम मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की भव्य मूर्तियां है। यह मंदिर सफेद इटालियन संगमरमर से बनाया गया है। इसमें प्राचीन भारतीय शिल्पकला की झलक भी देखी जा सकती है। जो लोग राधा-कृष्ण भक्त हैं, वे वैसे ही यहां खिंचे चले आते हैं, जैसे कृष्ण अपनी लीलाओं से सबका मन मोह लिया करते थे। यहां की दीवारों पर हर तरफ राधा-कृष्ण की रासलीला वर्णित है।

30 हजार टन संगमरमर से बना सवा सौ फुट ऊंचा मंदिर

30 हजार टन संगमरमर से बना सवा सौ फुट ऊंचा मंदिर

इस मंदिर को बनाने की घोषणा बरसाना के जगतगुरु कृपालुजी महाराज ने की थी। वर्ष 2001 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ, जिसके 11 साल बाद करीब 1000 मजदूरों ने अपनी कला का बेजोड़ नमूना पेश करते हुए 2012 में इसे तैयार कर दिया था। 15 फरवरी से 17 फरवरी 2012 तक इसका उद्घाटन समारोह हुआ। 17 फरवरी 2012 से ही इसे सार्वजनिक रूप से खोल दिया गया। पुजारी बताते हैं कि इटली से आए 30 हजार टन संगमरमर पर इस सवा सौ फुट ऊंचे मंदिर की सूरत दी गई है।

सत्संग हॉल में एक समय में 25,000 लोग बैठ सकते हैं

सत्संग हॉल में एक समय में 25,000 लोग बैठ सकते हैं

प्रेम मंदिर के बगल में 73,000 वर्ग फुट भूमि पर गुंबद के आकार का सत्संग हॉल का निर्माण किया गया है, जिसमें एक समय में 25,000 लोग बैठ सकते हैं। इस मंदिर को बनाने में 150 करोड़ रुपये लागत आई थी। मंदिर की ऊंचाई 124 फुट, लंबाई 122 फुट और चौड़ाई 114 फुट है। इसमें किंकिरी और मंजरी सखियों के विग्रह भी दर्शाए गए हैं। श्री राधा-गोविंद (राधा कृष्ण) और श्री सीता-राम ही इसमें पीठासीन देवता हैं।

94 कलामंडित स्तंभ हैं पूरे प्रेम मंदिर में

94 कलामंडित स्तंभ हैं पूरे प्रेम मंदिर में

इस पूरे मंदिर में 94 कलामंडित स्तंभ हैं। इस मंदिर के गर्भगृह के अंदर और बाहर प्राचीन भारतीय वास्तुशिल्प का नमूना दिखाते हुए नक्काशी की गई है। यहां संगमरमर की चिकनी स्लेटों पर 'राधा गोविंद गीत' के सरल दोहे लिखे गए हैं। जिन्हें भक्त आसानी से पढ़कर समझ सकते हैं। कई श्रद्धालु कहते हैं कि जब मथुरा आना जरूरी हो जाता है, तो इस मंदिर के दर्शन किए बिना लौटना अच्छा नहीं लगता।

'ऐसा एहसास मिलता है, जैसे स्वर्ग में पहुंच गए हैं'

'ऐसा एहसास मिलता है, जैसे स्वर्ग में पहुंच गए हैं'

ब्रिटिश भक्तों की एक टोली ने कहा, जीवन में पहले इतना सुंदर दृश्य किसी मंदिर में नहीं देखा। यहां आकर ऐसा लगता है जैसे वे स्वर्ग (holy places) में पहुंच गए हों। खासकर, जन्माष्टमी के मौके पर इसकी छठा देखते ही बनती है। बाहर से देखने में यह मंदिर जितना भव्य लगता है, उतना ही सुंदर अंदर से भी लगता है। इस भव्‍य मंदिर में हमेशा लोगों की भीड़ रहती है।

30 सेकेंड में बदलता रहता है मंदिर का रंग

30 सेकेंड में बदलता रहता है मंदिर का रंग

दिन में जब इस मंदिर को देखते हैं, तो यह एकदम सफेद नजर आता है। मगर, शाम को नजारे देखते बनते हैं। स्पेशल लाइटिंग से मंदिर का रंग हर 30 सेकेंड में बदलता रहता है। यहां भगवान राधा-कृष्ण और कृपालू महाराज की विविध झांकियों का अंकन किया गया। वर्ष 2014 में कृपालू महाराज का निधन हो गया। हालांकि, इस दौरान भी ब्रजभूमि में कई मंदिरों का निर्माण कार्य होता रहा।

जानिए, आप कैसे पहुंचें मंदिर के दर्शन करने

जानिए, आप कैसे पहुंचें मंदिर के दर्शन करने

यदि आप मथुरा जिले से बाहर के हैं, तो प्रेम मंंदिर के दर्शन हेतु सबसे पहले आपको मथुरा पहुंचना होगा। हवाई जहाज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मथुरा से 46 किमी दूर आगरा का खेरिया एयरपोर्ट है। इसके अलावा 136 किमी दूर दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है।

देशभर से चलती हैं मथुरा के लिए सीधी ट्रेनें

देशभर से चलती हैं मथुरा के लिए सीधी ट्रेनें

देश के अन्य प्रमुख शहरों से मथुरा के लिए नियमित ट्रेनें हैं। यहां के 2 प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं मथुरा जंक्शन और मथुरा कैंट। ट्रेन से उतरने के बाद आपको वृंदावन के लिए वाहन लेने होंगे। मथुरा नियमित बसों के माध्यम से भी देश के अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।

ऐसे पहुंचें मथुरा से वृंदावन

ऐसे पहुंचें मथुरा से वृंदावन

मथुरा से वृंदावन करीब 14.4 किलोमीटर दूर है। नेशनल हाईवे-19 अथवा नेशनल हाईवे-44 से बस या वैन के जरिए आधे घंटे में वृंदावन पहुंचा जा सकता है। मथुरा से वृंदावन के लिए कैब, आॅटो या बाइक भी कर सकते हैं।

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