हेमा मालिनी ने पूरी की 84 ब्रज कोस यात्रा, मिली कई खामियां, बोलीं- दयनीय हालत है

मथुरा, 26 अप्रैल: बीजेपी सांसद हेमा मालिनी ने चौरासी कोस ब्रज यात्रा पूरी कर ली है। अपनी यात्रा के दौरान उन्हें कई खामियां मिली हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में हेमा मालिनी ने बताया कि उन्होंने ब्रज यात्रा के दौरान 43 गांवों और 32 पड़ाव स्थल का दौरा किया और ज्यादातर जगह की हालत दयनीय है। पूरे परिक्रमा मार्ग पर कहीं भी टॉयलेट न होने की वजह से महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सांसद हेमा मालिनी ने कहा कि जल्द ही परिक्रमा मार्च पर शौचालय बनाए जाएंगे।

2 KM पर बनेंगे टॉयलेट, बाथरूम और अस्थायी रूम

2 KM पर बनेंगे टॉयलेट, बाथरूम और अस्थायी रूम

मथुरा सांसद हेमा मालिनी ने कहा कि हर दो किलोमीटर के बाद शौचालय, स्नानघर, ठहरने के लिए अस्थायी व्यवस्था, प्रवचन के लिए हॉल, पूरे मार्ग पर पेड़ आदि की व्यवस्था की योजना बनाई गई है। हेमा मालिनी ने कहा कि यूपी ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्रा और उनकी टीम के साथ 84 कोस ब्रज यात्रा के नवीनीकरण के दौरान शामिल किए जाने वाले कार्यों के बारे में जानकारी हासिल की।

84 कोस परिक्रमा को राष्ट्रीय महामार्ग घोषित किया जा चुका है

84 कोस परिक्रमा को राष्ट्रीय महामार्ग घोषित किया जा चुका है

बता दें, केंद्र सरकार ने बृजभूमि की 84 कोस परिक्रमा को राष्ट्रीय महामार्ग घोषित किया है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इसका पूरा श्रेय हेमा मालिनी को दिया था। इसी साल जनवरी में गडकरी ने कहा था कि भारत माला-2 के तहत 5,000 करोड़ की योजना का भूमि पूजन चुनाव के बाद किया जाएगा, जबकि इसको 2022 तक पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि योजना के तहत हर परिक्रमा मार्ग पर पांच फीट चौड़ी घास की क्यारियां बनाई जाएंगी, सड़कों के दोनों ओर पेड़ लगाए जाएंगे ताकि परिक्रमा करने वालों को अच्छा अनुभव हो सके। हॉल्टिंग प्वाइंट में भोजनाल, शौचालय और अन्य सुविधाओं की पूरी व्यव्स्था की जाएगी।

क्या है 84 कोस ब्रज यात्रा की मान्यता ?

क्या है 84 कोस ब्रज यात्रा की मान्यता ?

बांके बिहारी मंदिर के पुजारी ने कहा कि जुलाई और अक्टूबर के बीच सबसे ज्यादा लोग तीर्थयात्रा पर आते हैं, क्योंकि एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान कृष्ण की आज्ञा के अनुसार देश के सभी तीर्थों के प्रमुख इन चार महीनों के लिए बृजभूमि में रहते हैं। पुजारी के मुताबिक, 84 कोस ब्रज यात्रा भगवान कृष्ण ने नंद बाबा और उनकी माता यशोदा की इच्छा को पूरा करने के लिए शुरू की थी।

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