Thackeray Caste: 20 साल बाद साथ आए उद्धव और राज! किस जाति से संबंध रखता है ठाकरे परिवार?
What is the caste of Thackeray? कहते हैं राजनीति में न तो कोई स्थायी दुश्मन होता है और न ही स्थायी दोस्त, लेकिन जब 'ठाकरे' सरनेम वाले दो शेर एक साथ दहाड़ते हैं, तो उसका असर केवल मुंबई (Mumbai) नहीं बल्कि दिल्ली (Delhi) की सत्ता तक महसूस होता है। 20 साल का लंबा वनवास, कड़वी बयानबाजी- सब कुछ पल भर में धुंधला हो गया जब 'मातोश्री' और 'शिवतीर्थ' के वारिसों ने एक-दूसरे का हाथ थामा।
यह केवल एक चुनावी गठबंधन नहीं है, बल्कि 'मराठी अस्मिता' के उस किले को बचाने की जंग है जिसे उनके पूर्वजों ने अपने खून-पसीने से खड़ा किया था। लेकिन, इस सियासी भूचाल के पीछे आखिर वह कौन सी 'शक्ति' है जो इस परिवार को महाराष्ट्र का अघोषित 'सुप्रीम' बनाती है? इस पावरफुल बॉन्डिंग के पीछे छिपी है एक गौरवशाली जाति और विरासत।

'ठाकरे ब्रांड' का शक्ति प्रदर्शन
महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में विपक्ष की करारी हार के बाद अब उद्धव और राज ठाकरे 'एक्टिव मोड' में हैं। मुंबई की सत्ता (BMC) को वापस पाने के लिए दोनों भाइयों ने 29 नगर निगमों के लिए गठबंधन का ऐलान कर दिया है। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्धव ठाकरे ने दो टूक शब्दों में कहा, 'महाराष्ट्र का नेतृत्व केवल ठाकरे ही कर सकते हैं।' उन्होंने याद दिलाया कि 107 शहीदों के बलिदान से मिले महाराष्ट्र के आंदोलन की अगुवाई उनके दादा कर रहे थे और उनके पिता (बालासाहेब) भी उस संघर्ष का हिस्सा थे।
दिल्ली को सीधी चुनौती
उद्धव ठाकरे ने इस गठबंधन को दिल्ली की सत्ता के खिलाफ एक ढाल बताया है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि दिल्ली में बैठे लोग हमें तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस बार हम नहीं टूटेंगे क्योंकि यह उन शहीदों के बलिदान का अपमान होगा। वहीं, राज ठाकरे ने बड़ा दिल दिखाते हुए कहा कि महाराष्ट्र और मुंबई किसी भी आपसी झगड़े से बड़े हैं। उन्होंने साफ कर दिया कि सीटों का बंटवारा मायने नहीं रखता, मायने रखता है तो बस यह कि मुंबई का मेयर 'मराठी' ही होगा।
शिवाजी पार्क का ऐतिहासिक मिलन
गठबंधन से पहले का नजारा किसी महाकाव्य के दृश्य जैसा था। उद्धव और राज ठाकरे अपने बेटों-आदित्य और अमित ठाकरे के साथ शिवाजी पार्क पहुंचे। संजय राउत ने इस मौके को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि जब बालासाहेब का पूरा परिवार एक साथ आता है, तो वह केवल एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि एक अजेय शक्ति बन जाता है।
Thackeray Caste: ठाकरे उपनाम का भ्रम और वास्तविकता
अक्सर लोग 'ठाकरे' को महज एक जाति समझते हैं, लेकिन यह एक सम्मानित उपनाम है। महाराष्ट्र में इसे 'ठाकरे' कहा जाता है, तो गुजरात में 'ठक्कर', मध्य प्रदेश में 'ठाकुर' और उत्तर भारत में 'ठकराल' जैसे मिलते-जुलते नाम मिलते हैं। लेकिन, महाराष्ट्र का यह विशिष्ट ठाकरे परिवार जिस जड़ से जुड़ा है, वह बेहद खास है।
चंद्रसेनीय कायस्थ प्रभु (CKP) की विरासत
ठाकरे परिवार का संबंध 'चंद्रसेनीय कायस्थ प्रभु' (CKP) समुदाय से है। यह जाति महाराष्ट्र की सबसे शिक्षित, प्रभावशाली और रणनीतिकार जातियों में शुमार है:
- इतिहास का गौरव: CKP समुदाय के लोग ऐतिहासिक रूप से मराठा साम्राज्य के प्रशासन में सचिव, रणनीतिकार और योद्धा के रूप में सर्वोच्च पदों पर रहे हैं।
- प्रबोधनकार की छाप: बाल ठाकरे के पिता, केशव सीताराम ठाकरे (प्रबोधनकार), इसी समाज के एक महान सुधारक थे, जिन्होंने जातिवाद के खिलाफ लड़ते हुए भी अपनी बौद्धिक विरासत को जीवंत रखा।












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